काम करो ऐसा कि एक पहचान बन जाए,
हर कदम यूँ बढ़ो कि निशान बन जाए।
यहाँ तो साँसें सब ले लेते हैं ज़िंदा रहने को,
ज़िंदगी जियो इस तरह कि मिस� read more >>
(Verse 1)
क्यों रुका है, क्यों डरा है, ज़रा खुद को पहचान ले
रास्तों पे धूल है गर, कदमों में तू जान ले
तेरी मंज़िल आसमाँ है, ज़मीं से ना बंधा रह
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जहाज़ तब तक नहीं डूबता,
जब तक उसमें कोई सुराख न हो,
इंसान भी तब तक मजबूत रहता है,
जब तक वो खुद को बेपर्दा न हो।
हर मुस्कान के पीछे एक कहान read more >>