उठो कि अब विश्राम नहीं,
रुकना तेरा काम नहीं।
समय की धारा को मोड़ दे तू,
हर पुरानी बेड़ियाँ तोड़ दे तू।
न हार का गम, न जीत का मोह,
बस कर्म मे� read more >>
हथेली की लकीरों में छुपा, कोई राज नहीं होता,
जो झुक जाए तकदीर के आगे, वो सरताज नहीं होता।
माना कि वक्त की लहरें, कभी विपरीत बहती हैं,
मगर � read more >>
न कोई चूक हुई मुझसे, न कोई अपराध किया,
फिर भी वक्त ने सजा सुनाई, ये कैसा न्याय जिया?
मैंने बोए थे फूल सदा, काँटों का उपहार मिला,
निर्दोष खड़ read more >>
राहों में कांटे होंगे ही, पैरों में छाले आएंगे,
मंजिल की धुन में राही, कई बार डगमगाएंगे।
गिरना कोई हार नहीं, ये तो बस इक विराम है,
जो गिर� read more >>
कलम चाहे हज़ार हों, पर बात क्या होगी?
जो शब्द ही न पास हों, तो शुरुआत क्या होगी?
सजी हों अलमारियाँ, पर रूह ही न हो,
तो कागज़ों के साथ फिर, मुला read more >>
पत्थर की मूरत को छप्पन भोग लगाते हो,
सोने के गुंबद पर तुम चांदी चढ़ाते हो।
वो तो जगत का स्वामी है, उसे क्या कमी है?
असली जरूरत तो यहाँ, आँ� read more >>