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समाजिक
बाजार में एक चिड़ीमार तीतर बेच रहा था...दगाबाज
दगाबाज बाजार में एक चिड़ीमार तीतर बेच रहा था... उसके पास एक बडी जालीदार टोकरी में बहुत सारे तीतर थे..! और एक छोटी जालीदार टोकरी में सिर्�
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इच्छाएं बेअंत है
इच्छाएं बेअंत है,काबू में रख यार। बेहिसाब रख प्यार को, सुख मय हो परिवार।। इच्छाएं बेअंत है, परम् जरूरी आप। मैं चाहूं जग का भला, करूं मं
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जलने लगे अलाव अब
जलने लगे अलाव अब,ठंढ़ी चारों ओर। थड़थड़ हैं तन कांपते, बंधे नहीं है कौर।। जलने लगे अलाव अब,अमृत तुल्य है आग। बिना आग के जल नहीं,गाते सब
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सुख दिख हैं मेहमान जी
सुख दुख हैं मेहमान जी,स्वागत करना काम। दो ही पहलू सत्य है,कभी सुबह तो शाम।। सुख दुख हैं मेहमान जी, सही सिखाते मर्म। सुख में भी प्रभु मै
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स्पर्धा का दौर है
स्पर्धा का दौर है,मन को रखें बुलंद। रखिए ऊँच विचार को, हों शीतल सम चंद।। स्पर्धा का दौर है, रखें साथ उत्साह। कम हों कभी न चाह नव,लगे सु�
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छाया सबको चाहिए
छाया सबको चाहिए, क्योंकि सभी में कष्ट। ऐसे में छाया मिले, होता विकार नष्ट।। छाया सबको चाहिए,तन्हा सब हैं आज। साथी बनकर साथ चल,सुन्दर �
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खुशियां मय संसार था
चले स्कूल शिशु सभी,पानी मय है राह। बैग स्कूल का लिए,चंचल सबका चाह।। सब कागज के नाव को,लिए हुए हैं हाथ। तैराने में हैं लगे, सभी दोस्ते�
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चले स्कूल शिशु सभी
चले स्कूल शिशु सभी,पानी मय है राह। बैग स्कूल का लिए,चंचल सबका चाह।। सब कागज के नाव को,लिए हुए हैं हाथ। तैराने में हैं लगे, सभी दोस्ते�
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साथी बन अनुराग का
माया के भ्रम जाल का,ढूंढें सभी निदान। जाते पर सब ही उलझ,छूटे नहीं गुमान।। माया के भ्रम जाल से, बचें सदा इन्सान। साथी बन अनुराग का,उनका
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मेंढक हैं बरसात के
मेंढक हैं बरसात के, इनकी अभी बहार। करते मिलकर ये मजे, कुछ दिन में बेजार।। मेंढक हैं बरसात के, समझ रहें हैं शेर। सवा शेर से जब मिले, हो ज�
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मेंढक हैं बरसात के
मेंढक हैं बरसात के, इनकी अभी बहार। करते मिलकर ये मजे, कुछ दिन में बेजार।। मेंढक हैं बरसात के, समझ रहें हैं शेर। सवा शेर से जब मिले, हो ज�
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माया के भ्रम जाल
माया के भ्रम जाल का,ढूंढें सभी निदान। जाते पर सब ही उलझ,छूटे नहीं गुमान।। माया के भ्रम जाल से, बचें सदा इन्सान। साथी बन अनुराग का,उनका
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