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अहंकार
अहंकार * मानवता का आदर्श मर्यादा से अभिसिंचित होता है । मनुष्य का मनुष्य के प्रति व्यवहार मर्यादा से ही आबद्ध रहता है, शरीर में जैसे त�
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जाति भेद
क्युं जाति के नाम पर गुनाह हजारों पल रहे हैं, उच्च नीच की तराजू में नित तोल रहे हैं । क्या ठप्पा लगाकर आए थे सब के मैं धनी तु निर्
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आशाएं
बड़ी आशाएं होती हैं एक लड़की की,उन आशाओं में रंग भरना उतना ही मुश्किल, मुश्किलों और जमाने से लड़,जब एक नारी निकलती हैं अपने सपनो की उड़ा
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तेरे दोस्तों ने
तेरे दोस्तों ने, संग तेरे बस एक शराब पी है। क्या ,ऐ ही तेरी दोस्ती है। -2 सच,भुल गया । तेरा दिल नहीं ,कोइ यहाँ काब�
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कुंडलिया छंद
चाहत अभी जवान है,गौरव मय है भाल। साँस साँस में हौसला,भारत का हूं लाल।। भारत का हूं लाल,शत्रु पर भाड़ी पड़ता। वैसे हूं दिलदार,करूं कभी न
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रोला छंद
अब तो आंखें खोल,देख अदभुत नव सूरज। भारत का हूं लाल,तिलक करता हूं भूरज।। गति में सारे लोग,फलक छूने में आगे। हासिल करे मुकाम,गोली से दुश्
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अब तो आँखें खोल
बहुत हुआ है देर अब,अब तो आंखें खोल। सूरज लाए दिवस नव,जो है अति अनमोल।। नित्य बढ़े यह रोग अब, अब तो आंखें खोल। मानवता पर घात है, हो जाएं स�
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बहुत हुआ है देर अब
बहुत हुआ है देर अब,अब तो आंखें खोल। सूरज लाए दिवस नव,जो है अति अनमोल।। बहुत हुआ है देर अब,सुन लो प्रभु फरियाद। जीवन को रंगीन कर,बना मुझ�
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जनसंख्या को बढ़ावा
जब मेने न्युज देखी तो मुझे लगा कि क्यों ना जनसंख्या पर और लिखा जाए। कि किस प्रकार हमारी सरकार जनसंख्या को बढ़ावा दे रही है। और हम उनकी ब
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जिंदगी की हकीकत...
जिंदगी की हकीकत को बस इतना ही जाना है, दर्द में अकेले और खुशियों में जमाना है। सबक जिंदगी ने सिखाया है मुझे, हर अपने ने रुलाया है मुझे ।
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सबकी नींद हराम (दोहा छंद)
सबकी नींद हराम है,और सभी में भीति। फिर भी डरना है मना,मानव की यह रीति।। सबकी नींद हराम है,परेशान सब लोग। कोविद भारी रोग है,पैदा करता सो
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चाहत (कुंडलिया छंद)
चाहत कभी न यूं मरे, बड़े स्वप्न को देख। जिन्दा दिल हर पल रहें, प्राण बने नव लेख।। प्राण बने नव लेख,जिसे पढ़कर सब सीखे। और करे उत्कर्ष,रह
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