2022
ना कोई गिला है,
ना शिकवा-शिकायत है।
जो भी लिया-दिया,
सलाम ए कबूल है।।
"मलाल नहीं दिलों में,
प्रेम ही प्रेम भर लें"
2023
का स्वागत कर� read more >>
एक कहानी है मेरी जो अधूरी रह गई
करने बैठा था पूरा स्याही ही कम पड़ गई
जेल पेन समझ के मैं लिखता गया वो चलती गई
में लिखता गया वो चलती गई, कम read more >>
" ,
कर कुछ नया इन आशो से,
लोग तो कहेंगे अच्छा या बुरा,
क्या फर्क तुझे इन बातों से,
है चाह इतिहास बदलने की,
तो शुरू कर अभी से ,
जो होगा समझ ल read more >>
"जीवन संघर्ष रूपी बहता जल है,
जीवन कई पन्नों की पूरी किताब है,
जीवन अपनों से मिली नई आगाज है,
जीवन फिर भी लाजवाब है और,
जीवन जीने का सबक read more >>
रचना- "नारी तू अविचल है।"
रचनाकार- जितेन्द्र शर्मा
विधा- कविता
तिथी-29/12/2022
नारी!
नारी तू अविचल है।
पंकज सी कोमल है पर द्रढ है तू गिरि read more >>