उम्र दराज दरख्तों को, आंगन में लगे रहने दो,
फल दे ना दे , छांव बेहिसाब देगा ।
तुम बड़े हो जिस डाल के नीचे,
तुम खेले हो जिस दरख़्त के पीछे ।
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इस नए वर्ष पर लोगो ने बहुत कुछ लिखा ।
पुराना वर्ष बहुत कुछ यादे दे चला ।
आया था वो भी बहुत जोर और शोर से।
पर उसको शायद समय चक्र का अभाष न थ read more >>