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सपनें सजाता हूं इस जीवन, तन्हा मै बुनता ख्यालें-ख्वाब। जोड़ता हूं मै वो हर चाहत, सफर का मंजिल अनंत-जीवन।। मोती- read more >>
ये जिंदगी की रफ्तार है साहब ये तो अपने हिसाब से चलता रहेगा समय कैसा भी हो किसी का वो भी वक्त के साथ निकलता रहेगा अगर कुछ करना है तो वक्त � read more >>
बचपन के दिन अब वो याद आते है वो गलियां वो चौबारे अब हमे बुलाते है। मिट्टी के वो गुड्डा और गुड़िया जाने क्यों हम बनाते थे घर घर से मिट्ट� read more >>
ये जिम्मेदारियां ही तो है जो इंसान को वक्त के साथ चलना सीखा देती है हालात कैसा भी हो लड़खड़ाने के बाद सभलना सीखा देती है कोई गिरता हैं � read more >>
वचन की आड़ कैकयी, मांगी वनवास रघुवर का। महाबलि बालि को मारा, राम ले परदा तरुवर का। इच्छा मृत्यु भी मृत्यु मांगे, परदा शिखंडी तुवर का। स read more >>
#माननीयश्रीअटलबिहारीवाजपेई माननीय श्री अटल बिहारी वाजपेई जी के सुशासन दिवस पर उनके चरण कमलों में समर्पित मेरी यह रचना कविता = ( भीड़ ) read more >>
कविता-जिम्मेदारियां जिम्मेदारियां एक बोझ है ढोने वाले पर लद जाते हैं, ना ढोने वाले को नासमझ/ नालायक/ आवारा लोग कह जाते हैं, जिम्मे� read more >>
कविता - पथ दूर भले हो पथ जीवन का त्याग हौसिला कभी न मन का चलना सीखो अपने पथ पर चलते चलना बढ़ हर पग पर आलस में ना समय गवांना बिना अर्थ ना read more >>
कविता - पथ दूर भले हो पथ जीवन का त्याग हौसिला कभी न मन का चलना सीखो अपने पथ पर चलते चलना बढ़ हर पग पर आलस में ना समय गवांना बिना अर्थ ना read more >>
सदियो से चलती आ रही आज भी वह चलती है जिसने बहुतो को लूटा औसर है वह कुप्रथा जब किसी का देहा� read more >>
कहीं जिद पूरी कही जरूरत भी अधुरी कहीं सुगंध भी नहीं कहीं पूरा जीवन कस्तूरी इसी का नाम है जिंदगी लिखना था कि खुश हैं तेरे बगैर भी यहां � read more >>
कविता -पैगाम वह नन्हा अबोध नासमझ को क्या पता! मां न रही अब दुनिया में, पर छुपाया गया उससे बिना कोई किए खता! वह आज भी भेजता है read more >>
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