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मुलाकात परी से
एक रात की बात है, सोया मैं था, अचानक सामने कुछ आभास हुआ। चौंक कर मैं उठ बैठा, सामने देखा, एक खूबसूरत बला की सुन्दरी खड़ी है। मैं हर्षित
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मनुज जन्म
मनुज कर्म करते चलें, जीवन में हो काम। जैसी करनी आपका, वैसा हो परिणाम।। मनुज जन्म सार्थक करें,होगा जग में नाम। बनें नेत्र तब समाज के,सद�
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जो विधि लिखा लिलार
जो विधि लिखा लिलार है,समझ इसे तूं ईश। कर्म राह चलता रहूं, कृपा करे जगदीश।। जो विधि लिखा लिलार है,होना नहीं हताश। नेक इरादे रख सदा,खुशि�
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हमराही
हमराही से प्यार है,करता सदा दुलार। जीवन भर का साथ है,खुशियां हो बौछार।। खुशियां हो बौछार जब, स्वस्थ रहे तब गात। जीने का तब है मज़ा,सुर�
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प्रेरक संदेश
कण- कण में हर जगह है, जड़- चेतन में भी है। यहां है वहां भी है, दाएं है बाएं भी है। ऊपर है नीचे भी है, मेरे अंदर है,सबके अंदर है। वह सत्य हरे�
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*प्रेरणास्पद कथाएं..✍🏻* ★★★*कला का अभिमान..*★★★ 💐प्रस्तुतकर्ता-सपनों का सौदागर.....करण सिंह💐
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ *प्रेरणास्पद कथाएं..✍🏻* ★★★*कला का अभिमान..*★★★ 💐प्रस्तुतकर्ता-सपनों का सौदागर.....करण सिंह💐 ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆�
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हरि_प्रेम
प्यारे तारे हरि लगे, लगते तुम हो चांद। दिव्य सितारे आप ही,होते कभी न मांद।। सदा सहारे आप प्रभु,अभिलाषा भी आप। मंजिल भी हो आप ही, करूं आ�
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वृंदावन सुखधाम है
वृंदावन सुखधाम है, जहां अटल अभिराम। राधा रमण निवास से, कण कण है गुलफाम।। वृंदावन सुखधाम है,सुन्दर मृदुल स्वभाव। प्रेम धार में मग्न स�
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संघर्ष करो
तुम थोड़ा तो संघर्ष करो। बढ़ चले चलो आगे मग में कांटों को चुभने दो पग में डटकर बाधा स्वीकार करो दुविधा को जीतो पार करो जो मिले उसी स�
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मन कहता है
मन कहता है कुछ ऐसा लिख दूं मैं अपने मन के भाव को शब्दों में व्यक्त कर दूं मैं ऐ मन तुम चाहो तो मैं कुछ ऐसा लिख दूं जो जीवन की कड़वी स
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*तुम विदेश क्यों जाते हो*
*तुम विदेश क्यों जाते हो* छोड़कर अपनी मातृभूमि को तुम विदेश क्यों जाते हो अपने स्वार्थ की खातिर तुम क्यों परदेशी बन जाते ।। मात-पित�
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मन वीणा के तार है
मन वीणा के तार है, रखूं मध्य में साज। गीत प्रेम का मैं सुनूं,कायम रहता राज।। मन वीणा के तार सा, उड़े फिरे यह तेज। रखता हूं सम्हाल कर,खुश�
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