' अब छोड़ो भी यार ' ऐसे कहते हुए निगार अपने पति नरेश को मनाती है, मगर अफसोस उसका पति मानने की जगह उसके हाथ को छिटक कर आगे चला जाता।वह फिर भी read more >>
अच्छाई के पैर किनारा नहीं पाते,।मगर,
सदैव अमृत तक पहुँच जाते हैं,,।।
वक़्त के आगे भला किसका पहरा है,।
जो जिय, गया, मुस्कान के साथ,।मगर,
उस read more >>
काले बादल आसमान में अपनी जगह बना ली थी, बारिश के बौछार होने लगी थी।उसी समय एक लड़का जिसका नाम आयन और उसकी उम्र १३ साल की थी वह स्कूल से अप read more >>
कविता -ख्वाइश
सुख जैसे कुछ
पाने की
दुःख जैसे कुछ
खोने की
कुछ खाने कुछ
पीने की
जग में जीवन
जीने की
"ख्वाइश"है।
नभ में खग सा
उड़ने read more >>
धितकार भरी नजर, फिजूल थे सबकी नजरो मे
न थी अहेमियत, बेकार केह रहे थे हर किसी ने
सफलता की शिखर चढ़े तो ,लगा की सुकून मिली
तब हम भी गिने जान� read more >>