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उम्र की सीमा नहीं ,है ,किस पार जाना,। कविता कहती है,सफर वहाँ तय हो, सन्नाटा रहित पनघट जिधर हो,। तब कहीं छलके भी तो ,यह आंखों का नीर , व्यर्थ read more >>
चिलचिलाती धूप में लू के थपेड़ों के बीच पसीने से तर -बतर चिथड़ों में लिपटी एक बूढ़ी -सीऔरत अपने दो बच्चों के साथ सड़क किनारे बैठी भीख � read more >>
हां, ज़माना बदल रहा है। यह,समाज को छल रहा है। बच्चे, दादा-दादी के, सानिध्य में रहते थे। एक था राजा, एक थी रानी, किस्से सुनते थे। बहन, बेटी � read more >>
कविता -अनुभव अनुभव, शबक है सीख है जीवन का मीत है। प्रेम एक अनुभव जो जीवन का जीत है। निराशा मजबूरी अनुभव की गीत है। हसा कर भी हसना य� read more >>
वक्त कुछ ऐसा बदला कि हम ना बदले आज पर हालात अब बदल गए जहां से जिंदगी की सफर तय किए थे फिर वहीं पर आ गए हम न बदले आज पर हालात अब बदल स् read more >>
कांच के कंगूरे, कांच की दीवार। रहने वाले कांच के, कौन करे पत्थर से वार? इस दुनिया में कांच के, चिरक ढांस हैं घर। रहने वालों में, अजीब -सा स read more >>
कविता -आंगन बांटों ना आंगन बन्धु! आज तोड़ो ना रिस्तें मधुर आज। तुलसी सी मां-ममता महके घर का कोना कोना गमके जीवन की ज्योति read more >>
जहां आप, अपने रहकर भी हो लुप्त। आप ही सुस्थ, बाक़ी सब सुस्त। जिस शिखर पर आप, अपने बहुत पीछे छूट जाएं। चाहकर भी आपका, नजरों से नाता टूट जा� read more >>
चल मुसाफिर एक राह पे चल जिंदगी के एक गुमराह पे चल हर लोग है बुरे भले तुम्हें चलना है अकेले जिस राह पे अनेक कांटा है उसी राह पे जिंदग� read more >>
कविता -मुलाकात चलता गया चलता रहा मिलता रहा हर लोग से, जीवन सफ़र कटता रहा मुड़ता गया हर मोड़ पे, जितने मिले जैसे मिले अपने मिलें या read more >>
इत्र से खुशबू को महकाना। कौइ बडी बात नही है। मजा तो तब आता हैं। जब खुशबू आपके किरदार से आये। read more >>
जिंदगी में अपनापन। हर कोई दिखाता है। पर अपना कौन है। ये तो सिर्फ वक्त बताता हैं। read more >>
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