कविता -लालसा
लालसा न चाह का है ,जीवन में कुछ पाने को
लालसा न बड़ा बनू, न बहुत कुछ कर जाने को
छीन कर खुशियां किसी की, रोटियां दो वक्त की
म� read more >>
अंतिम, आशा ,के, फूल,लूटा रही हूँ,।
कविता हूँ,।मैं,, देह ,अपना, जला कर।
पथ, के, अंधकार को डरा रही हूँ,।
बड़ी ,भयावह रही ,इक घटना ,।
कागज तो बहा,प� read more >>
एक गांव में एक मकान था जिसमें एक छोटा - सा परिवार रहता था।परिवार में कुल 4 सदस्य थें मां- बाप और उनके दो बच्चे दोनों ही लड़की थें।उन लोगों read more >>
क्या कसूर था उस ननी जान
छीन लिया सब कुछ......
बडा दि उस लाचार की ओर नौ महीने की प्रसव पीड़ा
क्या कसूर था उस ननी जान
नहीं जानता वह क्या धर्म.. read more >>
अंजू एक बहुत ही होशियार ,समझदार और पढ़ाई में बहुत तेज थी वह जिस स्कूल में पढ़ती थी वहां बारहवीं कक्षा तक की पढ़ाई होती थी, आगे की पढ़ाई क� read more >>