मैं ,,जीयूं इस तरह , कि विभव में भोर हो जाए,
मैं,, जीयूं इस तरह ,की कविता हर ओर हो जाए,
देश ,लिखने वाले द्वेश नहीं लिखा करते,
मिट्टी में भी सुग read more >>
अरसे बाद,खुद को पहचान पाई हूं,
ये मेरे अहसास की सुगन्ध है,।
समय का इक पहलू ,मेरा बड़ा भयभीत रहा ,
फिर भी मुसाफिर इक जिन्दाबाद रहा,।
ज़िन्� read more >>
ज्योति और राजेश की शादीशुदा जीवन अच्छे से बीत रही थी, पर राजेश की मां को ज्योति फूटी आंख नहीं भाती थी। वह बात - बात पे ज्योति को नीचा दिखा read more >>