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बचपन के खेल
काली-पीली आंधी में, काग़ज़ को उड़ाना। मेह बाबा आ जा, दूध राबड़ी खा जा, कह बारिश को बुलाना। दौड़ लगाते गलियों में, होकर नंग धड़ंग। मैं, मे
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बड़े दिन की शुभकामनाएं
छोटे दिन बीत गए बड़े दिन आए, क्रिसमस डे की शुभकामनाएं, सभी खुश, सलामत रहे, बस दे रहे हैं दिल से दुआएं।
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छोटो को प्यार बड़ों को नमस्ते
छोटों को प्यार, बड़ो को नमस्ते, क्रिसमस डे मनाओ, हंसते हंसते। हैप्पी क्रिसमस डे
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बदला नही बदलाव
बदलती है आरज़ू हर दिल कि, चाहत से लेकर राहत तक! होता है तिलक परिवर्तन का, मंजील से लेकर आहत तक!! बदलने मे निरत हैं सुबह शाम,
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श्रद्धा कि अंजली
श्रद्धा कि अंजली है स़मा संघर्ष कि संघर्ष कि है दास्तां, मुश्किलें कंकड़ बनी और जड़ बना है ये जहां! कह रही राही से राहें डर नही त
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संसार में दो तरह के परिंदे हैं
संसार में दो तरह के परिंदे हैं, एक घायल होकर मर गया, एक जिंदा रहकर कुछ कर गया।
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हौसला
साल दर साल, साल बदल जाते है न जाने कितनों के मुकाम बदल जाते है और बदलते नही,जिन परिंदों के हौसले ए मुकाम आसमां खुद उनकी उड़ानों के लिए ख�
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जात पात
यह किस्सा है समाज का जहां हर जाति धर्म के लोग रहते हैं जो करते हैं बात कानून की जो नियमों को दोष दिया करते हैं अक्सर होते हैं वही समाज क�
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संस्कार
अच्छे संस्कार तन को पूर्ण रूप से ढकने तक ही नहीं बल्कि बुरे विचारों को अच्छाई से ढकने से भी है. लेखक पंकज कुमार बुड़ाकोटी
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परिंदा
काश मैं होता एक परिंदा उड़ता रहता, आसमान में बिना किसी रूकावट के दूर रहता दुनिया के झंझालो से, रखता नहीं कोई गलत विचार, ना करता दो रंग
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थकान का पसीना
मोती सा मस्तक पर झिलमिल लुढ़क रहा धीरे धीरे झर झर झरता पग तल रज में , जाता चूम चरण तेरे, इस मोती में भाग्य झलकता तेरा जी हो लेकर चल,
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नारी का सम्मान
नन्हें नन्हें पग लेकर आई हैं जग में बेटी , कहलाती हैं लक्ष्मी का रूप घर की शोभा हैं बढ़ाती, किलकारी से उसकी कलिया भी खिलखिलाती, नन्हीं �
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