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दिन
गुजर सकेंगे हर दिन सब बेकार के। मौसम आएगें ये जल्द बहार के।। भूल गए कष्टों को सपना जान के। खुश होंगें पल सारे रोज गुजार के।। जश्न मन�
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सोच
उजड़ गई बस्तियां बहुत सी है बनाने से पहले। थोड़ा सोच लेना दिल किसी का दुखाने से पहले।। करते हादसे घायल जिंदगी बसर तक यारों। कैसे जी सका
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लोग अपने मतलब के होते हैं
लोग अपने मतलब के होते हैं, अपने काम के लिए मीठे, काम निकलने के बाद कडुवा करेला बनते हैं।
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फागुन
रंग बसन्ती रंग में,चलती मस्त बयार। रोम-रोम पुलकित करे,जगा नेह मनुहार।। कलियां कोमल खिल उठी,फागुन भीगे रंग। रंग सृजन का भर रही,नव उमंग
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परिचय को मोहताज
परिचय को मोहताज फाल्गुन में आता हूँ धरा पे यौवन लाता हूँ तू मुझे नहीं जानता अपना नहीं मानता फूल बनकर आता हूँ कलियों में गूँथा जा�
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दिन
गुजर सकेंगे हर दिन सब बेकार के। मौसम आएगें ये जल्द बहार के।। भूल गए कष्टों को सपना जान के। खुश होंगें पल सारे रोज गुजार के।। जश्न मन�
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यु पी इलेकश
कोई हाथी कोई साइकिल तो कोई कमल खिला रहा है, चुनावी दौर है इंसान को मजहब सिखा रहा है। बांट दिया है इंसानियत को हिंदू मुस्लिम बनाकर, हमें
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स्वर कोकिला लता दीदी
ऐसी परम् आत्मा आप महान थीं, भारत देश के आप मान थीं। आपके अकस्मात निधन ने, संपूर्ण विश्व को रुला दिया है। भारत ने अपनी अद्भुत, कोहिनूर �
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खुद के पैरो पर चलोगे तो ठोकर नहीं खाओगे
खुद के पैरो पर चलोगे तो ठोकर नहीं खाओगे, थोड़ा गिर भी जाओ तो संभल जाओगे,आगे संभलकर कदम रखना धोका तो नहीं खाओगे।
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ज़माने रंग खूब देखें हमने
जमाने के रंग खूब देखे हमने, लोगों क़ो बदलते देखा हमने, कुछ समय बाद ही रंग कच्चा हो जाता है, रंग उतरता देखा हमने।
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समय
मुझे किताबें पढ़ने का बहुत शौक है बहुत सी किताबे मैंने खरीद रखी हैं जिन्हें मै अपने अलमीरा में सजा कर रखे हैं परंतु इन किताबों को पढ़�
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ये अटल हिन्दुस्तान रहेगा
कदम से कदम मिला के चलो बक्त अपने आप हार जायेगा समय पिछे रहे ना रहे तु आगे जरूर निकल जायेगा जीत उसी को मिलेगी जिसके पैरो मे रफ्तार ह
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