क़दर करो उनकी, जिनको उपेक्षित कहते हैं।
बनकर के ख़ामोश जनाज़ा, सब कुछ सहते रहते हैं।
वे सब की जानें, उनकी जाने न कोई।
जो उनकी जान ले, वो � read more >>
त्यागो व्यर्थ की क्रांति।
बोलो ओम् शांति, ओम् शांति, ओम् शांति।
एक सोम है, एक भानु है, एक व्योम साकार।
एक धरा है, एक वात है, एक ही सृष्टि क read more >>