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नववर्ष की बधाई
नववर्ष की मंगल बेला है सुख दुःख का नया झमेला है। गतवर्ष में जो भी झेला है वो जीवन का ही खेला है।। प्रभु पर हम सब विश्वास करें कुछ अच्छ�
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पैडमैन-बुखार कमरदर्द सिरदर्द मोटापा या दुबलापन खून की कमी और सुस्ती से परेशान
अक्षय कुमार अभिनीत माहवारी पर आधारित फिल्म पैडमैन के रिलीज होने के बाद मुल्क में ये चर्चा-ए-आम हो गया था कि मासिकचक्र के दरमियान और पश�
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व्यापार
व्यापार मात्र वस्तु का लेनदेन तक ही नहीं बल्कि रिश्तो कभी जरूरत के हिसाब से लेनदेन करने से है लेखक पंकज कुमारबुड़ाकोटी
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कुदरत
कुदरत ने जीना सीखा हमने यही हमारी धरोहर है जिसने किया अपमान इसका वही पूर्ण विरोधी है लेखक पंकज कुमार बुड़ाकोटी
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सार्थक जीवन
था कर गुज़रने का जज़्बा, ज़िंदगी पल भर की। अग्नि में तपकर एक लोहा, फाल बन गया हल की। धरती के दामन के संग, कृषक का हमराही। घिस -घिसके घिस ग�
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समाज
एक अच्छे समाज की कल्पना करने वाले दूसरों को तो प्रेरित किया करते हैं परंतु खुद को प्रेरित करने की आदत से वंचित रहते हैं भूल जाते हैं �
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रिश्ता
एक रिश्ता है अपने आप से मेरा जिसे समझने में जिंदगी लग जाती है खुद से बढ़कर कोई फिक्रदार नहीं मेरा धीरे धीरे ये बात समझ में आती है जिन �
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दुनिया
दुनिया में रिश्तो से ज्यादा पैसों की अहमियत है चंद रुपयों की खातिर अपनो को शरेआम कत्ल होता है, और रुपयों के खाते हैं बेगानों को अपना बन
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किताब
किताबी ज्ञान से बढ़कर जीवन का संघर्ष हमें सिखाता है कि कब, कहां और किस परिस्थिति में हमें खुद कैसे हल ढूंढना है. लेखक पंकज कुमार बुड़ाक�
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পরম সু:খম সন্তাপ করম
পরম সূ:খম সন্তাপ করম, অভিদা , নিবিদা পরবস্তী তে! এই মনের নগরকে উচ্চো রাখে, কোতোই বেদনা হারিযে দে।। আপ: হৃদয জোদী কষ্ঢে থাকে,
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कर्म का अभिनंदन
धरा धरी वीरों कि गती से, है दृश्य चेतना चंचल सी! कंचन है जगत के कथित कथा , और पावन जग के कर्म सभी!! चलती है हवा ले कर जगती का,
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कलम
गलत शब्दों का कागज पर उतारना कलम का दोष नहीं यह तो लिखने वाले की सोच और कलम चलाने के ढंग पर निर्भर करता है ।
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