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❛वो औरत दौड़ कर रसोई तक, दूध बिखरने से पहले बचा लेती है। समेटने के कामयाब मामूली लम्हो में, बिखरे ख्वाबो का गम भुला देती है। वक़्त रहते read more >>
*सही सोच का नतीजा* कहा जाता है कि जितनी बडी सोच हमारी होगी उतना ही ज्ञान का विस्तार भी होगा। यानी हमारी सोचने समझने की शक्ति अन्य लोग � read more >>
जब सूरज निकलने से पहले चिड़ियों की चहचहाहट सुनाई देगी, माँ की आरती शुरू करते ही दूध वाले अंकल बेल बजाएंगे, अख़बार वाला आया की नहीं, और read more >>
पिता की भावनायें माँ को गले लगाते हो, कुछ पल मेरे भी पास रहो ! ’पापा याद बहुत आते हो’ कुछ ऐसा भी मुझे कहो ! मैनेँ भी मन मे जज़्बातोँ क� read more >>
मिल जाए वक़्त ज़रा सा अगर तो लौट आना कभी अपने घर तुम्हे याद कर अक्सर रोता है आँगन में खड़ा वो बूढ़ा शज़र — त्रिशिका श्रीवास्तव ‘ read more >>
दिन बदलते हैं ,साल‌ भी बदल जाते हैं, हर वक्त एक सा नहीं रहता, यहां लोग बदल जाते हैं, खुद के भरोसे ही नाव चलाना, यहां मांझी ही पलट जाते है� read more >>
भारत में रहने वाले भारत की सभ्यता हम जाने,जब कोई आ जाये घर पर मेहमान , उसका सत्कार करना इंडिया जाने।जो करें मेहमानों का तिरस्कार वो ह� read more >>
//... कैसे हो भैया ...// क्या पुराना और क्या नया है भैया...? वैसे , ऐसे और कैसे हो भैया...? वही देते , वही बटोरतें...! वही चोर हैं और वही लुटेरे...! क� read more >>
लोग कहते हैं कि सैकड़ों मुल्क हैं तुम्हारे लेकिन फिर भी फिरते हो दर दर मारे कभी बर्मा कभी काबुल कभी फिलीस्तीन कभी यमन से भगाए जाते ह� read more >>
वक़्त का पहिया कारवाँ गुजर जाते हैं खंडहर शेष रह जाते हैं बेपनाह दर्द लिये अपनी जुबानी अपनी कहानी कह जाते हैं नितांत अकेलापन � read more >>
सबसे प्रेम से बोलो, किसी को बुरा मत कहो, सबसे अच्छा व्यवहार करो, किसी का तिरस्कार ना करो। read more >>
"अंधापन इश्क का" उछाली जा रही पिता की पगड़ी फीकी पड़ रही भाईयो की मूछें जिम्मेदारी की एक पूरी मंडली कर रही तु� read more >>
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