नियति का न कोंई तोड़ !
नियति जब खोले पोल !!
हवस की गठरी भर नहीं पाए !
कर्म की लेखी मिट नहीं पाए !!
कर्म के जैसे बीज लगाए !
फूट के वो ही बाहर आए read more >>
//...कोरोना उपरांत...//
बीत रहे अब ,
दुख और भय से ,
अवसाद भरे दिन,
टूट रही है कड़ी ,
दूसरी लहर की...!
धीरे-धीरे ही सही,
फिर से रौनक लौट
रही है मे� read more >>
अच्छे अच्छे को ख्वाब दिखा देती है ,
धन-दौलत भी क्या है |
पता नही भगवान ने ऐसा क्या बनाया है ,
आज धन-दौलत की दुनिया है ,
अच्छे – अच्छे को चक� read more >>
//...सुप्रभात...//
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जीवन है
एक वीणा
सुख-दुख
इसके तार...!
इन दो
पहलू के ,
भंवर जाल
के बंधन में,
उलझा है ,
सारा संसार...!
इसलिए,
अपनी और
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