मैं एक इन्सान -
निर्धन की संसार ;
शिति - दीन हूँ ,
मुझे कहीं जगह ना मिला -
इसलिए उत्पीड़न की गर्भ में लिया स्थान ;
मैं आधि - व्याधि की गर्भ से � read more >>
नत नयन मेरी दृष्टि -
दो नयन में ! दो बूँद अत्रु लेकर ;
घर की चूल्हा देखकर ,
ऐ कैसी तेरी सृष्टि -
रे भगवान , हे अल्लाह ,
ठंड पड़ चुकी थी चूल्हा ;
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