देखते ही देखते जवान,
“माँ-बाप” बूढ़े हो जाते हैं…
सुबह की सैर में,
कभी चक्कर खा जाते है,
सारे मौहल्ले को पता है,
पर हमसे छुपाते है&hellip read more >>
चल रहा हु रास्ते से अनजान हूँ,
लिख रहा हु हर लफ्ज से अनजान हूँ,
कुछ बात होगी मेरे जीने मे
जी रहा हूँ पर दर्द से अनजान हूँ,
एक मोड़ आया जिं� read more >>
माँ झूठ बोलती है,
सुबह जल्दी उठाने सात बजे को आठ कहती
नहा लो, नहा लो, के घर में नारे बुलंद करती है ,
मेरी खराब तबियत का दोष बुरी नज़र पर मढ़त� read more >>
आदमी की औकात...
एक माचिस की तिल्ली,
एक घी का लोटा,
लकड़ियों के ढेर पे,
कुछ घण्टे में राख.....
बस इतनी-सी है,
आदमी की औकात !!!!
एक बूढ़ा बाप शा read more >>
सुबह जल्दी जगाने, सात बजे को आठ कहती है।
नहा लो, नहा लो, के घर में नारे बुलंद करती है।
मेरी खराब तबियत का दोष बुरी नज़र पर मढ़ती है।
छोटी छो� read more >>
दिल की बस्ती मे ले के आयें हैं,
चाँद मुठ्ठी मे ले के आयें हैं,
झूठ तुम को लगे तो तुम जानो,
हम तो सच्ची मे ले के आयें हैं,
कोई दुल्हन हो जैसे read more >>