कर्मो का सब खेल है, वरना तो कोई भी नहीं फैल है।
नियति कब कर्म और कर्म कब भविष्य बन जाता है,ये इंसान जान ही नहीं पाता है।
अपने पे आए तो कर्� read more >>
मेरे आश में दूर कहीं,
एक दिया जल रहा है।
मेरे प्यार में दूर कहीं,
एक दिया जल रहा है।
मेरे दिल में,
एक मधुर गुंजन सा चमकता है।
उस दिए के प� read more >>
Title :- कोई नहीं तुम जैसा है
जीवन मंच है अभिनय का ,
तो किरदार कहां तुम जैसा है
जीवन रण है गौरव का
तो वीर कहां तुम जैसा है
जीवन दमखम है दंगल क read more >>
बोझ !!
लेकर दिल मे, दिमाग मे,चिंताओं का बोझ!
जी रहा ईसान यहाँ, मर मर कर हर रोज !!
नहीं है यहाँ इलाज इस बोझ का !
साथ रहेगा यह, काम है इसका रोज का read more >>
मुझे तलाश है मंजिल की |
मैं बढ़ता हुँ अपनी मंजिल की ओर ,
फिर मन में ख्याल आता है ,
बढ़ रहा हुँ जिसे पाने के लिए ,
वो मेरी मंजिल नहीं |
फिर मैं म� read more >>