आगे बढ़ने की चाह !
और पीछे जा रहा है !!
आदम से आदमी !
आदमी से सभ्य !!
सभ्य से आदम !
हुआ जा रहा है !!
आदम का यह कारवां !
चांद पर जा रहा है !!
रफ़्� read more >>
ऩजर को लगी ऩजर, दिखाई देते पर दोष।
खुद को तो मानता, गुण-रत्न का कोष।
दूसरों की उघाड़कर, खुद की ढकने का होश।
दूर की जलती सूझे, घर में जले तो read more >>
ऐसे गांव की बात कुछ अलग ही है,, वह शहर से, बहुत ही अलग होता है,, अगर एक आदमी को कुछ हो जाए,, तो सारा गांव वाले दौड़ने लगते हैं,, अगर किसी के घर म� read more >>
** सुख और दुख **
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दुनिया में कहीं ना कहीं हर वस्तु का महत्व है कब कौन सी वस्तु अधिक महत्व रखती है यह हमें पता नहीं होता है और यह � read more >>
मेरे प्रिय मित्र बबलू, तुम मुझे माफ कर देना,,, मैं तुमसे मुलाकात कर नहीं सका, लेकिन मैं तुम्हारे लिए,, एक पत्र लिख कर जा रहा हूं_ इस पत्र मे� read more >>