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मन तो मन है, कैसे समझाऊं? आंसू तो आंसू हैं, कैसे मनाऊं? हिय उमड़े हुलाल, कैसे ग़म खाऊं? आंखें सूखी, मन आंसू कैसे छिपाऊं? दिशा, समां सब � read more >>
टूटा हुआ हू बड़ी सिद्धत से रूठा हुआ हू अपनी मोहाब्त से तजुर्बा है इस लिए तो कह रहा हु साहेब मरना काबुल है, इस मोहब्बत से           -   प्� read more >>
कोई परेशान है , कोई हैरान है। कोई क्या करे भूख की मार से मरे बेरोजगार क्या क� read more >>
एक अनोखी चीज है आई जिसने सबको दुनिया भुलाई सिमट गया सब उसके अन्दर जैसे हैं वो गहरा समन्दर रिश्ते नातों की कद्र नहीं उसकी कही हर बात स� read more >>
आओ प्यार के रंग में रंग जायें आज, जिन्दगी तब बन जाएगी अति खूब साज। रोना- धोना छोड़ दे जन - जन, आ खुशियों से आज रंग ले तन। क्यों डर read more >>
जिंदगी के दौड में कही कहनी बाकी हैं , अभी तो शिहाई पन्ने में डूबे हैं ऊंचाई की शिकार मुकम्मल होनी बाकी है...!! read more >>
प्रिय पाठकों, इस होली पर ढूंढ रही हू कुछ खोए हुए मानवता के रंग जो वक्त के साथ साथ इस आधुनिकता में कही खो गए हैं। होली के चमकदार, रंग बिरंग read more >>
दुनियाँ में तो ग़मों का महासागर है, पर हम भी तो हर गुण से आगर है। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:-समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार read more >>
आज इन्सानियत को लगता है किसी ने चुरा लिया है। आज अपना ही अपना बनकर सिर्फ धोखा दिया है। चिन्ता इसका हल नहीं वक्त के साथ सम्हलना पड़ेग� read more >>
मैं उस दौर में हूँ जहां, सबके शामियाने हैं । हर जगह अपने लिए, सबके पास बहाने हैं ।। एक मेरा ही घरौंदा है, जहाँ दीपक जलता है और सभी को तो, ए� read more >>
वो बातों में शब्दों को कुछ ऐसे पिरोता है। कि जैसे हीरे के पानी से मोती को धोता है ।। मैं निशब्द हूँ उसके फलसफा-ए-जिंदगी को देखकर। कि read more >>
नज़रों से देखा उनके तो नजराना अच्छा लगा दिलाएंगी चांद वो बहाना अच्छा लगा यकीन मानिए जब जब हंसी मां मेरी मुझे जमाना अच्छा लगा read more >>
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