प्रिय पाठकों, इस होली पर ढूंढ रही हू कुछ खोए हुए मानवता के रंग जो वक्त के साथ साथ इस आधुनिकता में कही खो गए हैं। होली के चमकदार, रंग बिरंग read more >>
मैं उस दौर में हूँ जहां, सबके शामियाने हैं ।
हर जगह अपने लिए, सबके पास बहाने हैं ।।
एक मेरा ही घरौंदा है, जहाँ दीपक जलता है
और सभी को तो, ए� read more >>