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फिर हौसला
जिस मोड़ पर सब लूट जाता है। अपना भी पराया हो जाता है। उस मोड़ से भी हम गुजरे हैं_ फिर हौसला ही साथ दे जाता है।। (स्वरचित मौलिक)
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कौन आया है
अरे! कौन आया है हरियाली की चादर ओढ़े टीसू रंग में रंगे अधर महक वादियों के खुशबू से जो तन मन में आ रही उतर, पीले सरसो के कुमकुम से सजी अ
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अपनापन
अपना बना के तो देखो। दिल दे के तो देखो। नजरें मिला के तो देखो। मेरी सूरत तेरे आईना में, नज़र आएगी। अपना बना के तो देखो। सपना स�
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ऊंट और झूठ
थमा न थमेगा, ऊंट, झूठ का चक्का। मौका़ मिलने पर दोनों, लंबा मारते छक्का। ऊंट, झूठ अंत में, दोनों भागते मक्का। पकड़ा पथ छोड़े नहीं, कच�
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मानसून
मानसून घनघोर गर्जन करते हुए, मोतियों की झालरों से सजे हुए, बादलों के मतवाले सवारी पर सवार, नभ में विद्युत की जगमगाहट के साथ, छ�
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तुम चाहो तो कर सकते हो
तुम चाहो तो कर सकते हो लक्ष्य....जो तुमने ठना हैं गमला तोड़ निकलना होगा यदि पेड़ बनाकर तुम्हें दिखाना हैं माना ये आसान नहीं है नामुम
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जाना खाली हाथ
*कविता* *जाना खाली हाथ* मुठ्ठी बांध कर आये हैं जाना खाली हाथ संग नहीं कुछ जाएगा छूट जाएगा साथ। जिंदगी भर हम सब यहां करते हैं खूब
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प्रीति _ प्रीति
प्रीति_प्रीति प्रीति है इस जहाँ से, प्रेम और श्रधा भी है। निर्मल हृदय मचल_ मचल कह रही है, थोड़ा और जीने दे मुझे। बहुमूल्य जीवन �
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भ्रम -भ्रमण
यह दुनिया, है भ्रम का टपरा। वरना मनुज, है मिट्टी का कमरा। भ्रम ही तो है, जिस पर टिकी है धरा। भ्रम का ही खेल है, पर-परा। तेरा, मेरा, सबक�
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बात चली है
गीतिका जाने कैसी बात चली है । सहमी-सहमी बाग़ कली है । जिन्दा होती तो आजाती, सायद बुलबुल आग जली है । दुख का सूरज पीढ़ा तोड़े, सुख की म�
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प्रश्नचिन्ह
कहानी प्रश्न चिह्न यदि आंखों को बादल और झर झर झरते आंसू को मुसलाधार बारिश तथा वक्त को आषाढ़ का दिन कहें तो कोई अतिशयोक्�
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बादल
बादल रूठ गये क्यों हो हमसे तुम? सूख गये क्यों हो जल से तुम? मुझे पता है क्यों रूठे हो? बूंद बूंद से क्यों सूखे हो? छोड़ो नादानी बच्�
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