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दुःखद
तेरे बिना वक्त भी-बेवक्त सा लगता है
बिना एक पल तेरेभी,खालीपन सा लगता है मेरे अब वक्त भी बेवक्त सा लगता है
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तजुर्बे नहीं -अनुभव की चाबियां
अपनी उम्र के लिफाफे अब दराज में रखे है।। हम ऊमीद की दुनियाँ से अब रिटायर हो चुके है। ये तजुरबे नहीं ,अनुभव कि चाबियाँ है। प
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ख़ामोशी-तन्हाई कि चादर ओढ़े सो रही है
एक दिन मैं एक गली से गुज़रा , एक चौखट पर लिखा था। थोड़ा तकल्लुफ़ कीजिएगा जनाब, अपने कदमों की आहट को थोड़ा ख़ामोश रखिएगा। अन्दर ख़ामोशी तन्हा�
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जीना नहीं देगी जुदाई तेरी
जीना नहीं देगी ए जुदाई तेरी हरपल याद आएगी वो बातें तेरी छोड़कर चला गया तू मुझको यही दर्द मुझे चोट देगी तेरी वफा के नाम पर किया बेवफाई
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एक आखेटक की कहानी
कहानी एक आखेटक की कहानी गजब हो गया। जी हां आपने बिलकुल सही सुना। सच में ही गजब हो गया.........।। तमिलनाडु के समीपवर्ती राज्य के वनों म�
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कोई ना समझे यहां पीर -पराई
कोई ना समझे यहां पीर -पराई, ना है किसी के पास किसी के दर्द की दवाई। हर कोई है यहां हरजाई, बस इसी बात की है दुहाई।। हर दुख को अपने दिल मे
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कैसी है ये जिन्दगी मेरी
कैसी है । ये जिन्दगी मेरी सब कुछ तो बया है। एक सच, दिल छुपा है। । एक राज .होठो को ढुढता है। । खुली पलको से देखा, मुस्कुराता हुआ ये �
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बेटी-जो माता पिता की आन हैं
"बेटी" जो माता पिता की आन हैं हर घर का सम्मान हैं वो बेटी आज लाचार हैं कोई बेटी कोयले की भट्टी में जली तो कोई किसी कुवे के अंदर मिली जि�
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कोई किसी को अपना नहीं मानता
आजकल कोई किसी को अपना नहीं मानता सब मतलब से रिश्ता बनाते है मतलब खत्म रिश्ता खत्म धन्यवाद
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हम तन्हा ही रह गए-अपना बनाकर देखो वो पराए हो गए
तन्हा थें हम तन्हा ही रह गए जो अपने थें वो बेगाने हो गए जिंदगी देखो किस मोड़ पर ला दी जहां ना जाना था वहीं आ गए आंसू अपने छिपाए कई दिन ह
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डरावनी रात-उन चार रातों ने मेरी हर एक रात को डरावना बना दिया
डरावनी रात जाड़े के महीने की उस भयंकर रात को भी मेरे सिर के ललाट पर पसीने की मोती जैसी बूँदें बरस रही थी। नहीं! वह पसीने की बूंदें गर्म�
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धरती मां का दुःख-मेरा घर तुम उजाड़ रहे हो मां कह के मुझे सता रहे हो
"धरती मां का दुःख" मेरा घर तुम उजाड़ रहे हो मां कह के मुझे सता रहे हो वनों को तुमने हटा दिया नदियों को गंदा बना लिया पहाड़ों पे तुम्हार
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