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स्त्री तेरी कहानी बड़ी पुरानी, काम काज घर वार में सिमटने वाली, पढ़ लिखकर भी घर में रहने वाली, आगे बाहर ना निकलने वाली, घर परिवार की सेवा read more >>
याद जब भी वो हमको आए हैं आंखों से आंसू रोक ना पाए हैं ऐसी भी क्या गुस्ताख़ी हो गई थी हमसे जो सजा पाए हैं जन्मों का रिश्ता एक पल में ठुक� read more >>
एक छोटे से शहर के एक सरकारी दफ्तर में एक कोने में एक बेंच पर एक 60वर्षीय बूढ़ा व्यक्ति रामलाल किसी चिंता में ध्यानमग्न सा बैठा था। उसके � read more >>
मैं प्रातः ही निकला था होकर एक मतवाला, पहले किया था स्नान,फिर पिया चाय का प्याला। मैं निकला था घर से खेत देखने के लिए , सुनहरी रेत देखन� read more >>
किताब -ए दर्द में खो जाने को जी चाहता है, ऐसी बेचैनी की रो जाने को जी चाहता है, दर्द में गुजर गई सारी जिंदगी, अब तो मौत की नींद सो जाने को ज� read more >>
चंगे दिल को तुने नंगा बना दिया, जा वेवफा तुने इस दिल पे हि दिल से दंगा करा दिया।तुझे दिया जमाने कि हर वो खुशी, पर मुझको ही तुने भिखमंगा बन read more >>
वो अमावस्या की काली ,खौफनाक और भयानक रात थी। कही पर रोशनी का कोई नामोनिशान तक ना था। पूरा अनंत काले मेघों से घिरा हुआ था।अनायास ही व्यो� read more >>
एक गरीब बच्चा था।जिसके माता-पिता नहीं थे। बचपन में ही उसके माता-पिता गुजर गये थे।उसके एक बूढ़ी दादी थी जिसने उसको पाला था।वह दूसरों के read more >>
कितनी आसानी से वफा को ‘बे’ लगा कर बेवफा बना देते है लोग। अफसोस इस चीज़ का है के उतनी ही आसानी से रिशतो में भी कुछ लोग वफादार को गलतफहमी read more >>
सात साल का एक छोटा लड़का था।वह गरीब परिवार से था।घर में उसके माता-पिता उसकी एक बहन थी।जब वह अपने पापा के साथ बाहार जाता था।लोग उसके पित� read more >>
कहूं क्या कहानियां, जीने के लिए बनी हैं। ना जाने कितनी पहेलियां, हैं एक उलझन जीवन सुलझ के भी ना सुलझ पाये।एक थी मासूम सी लड़की था खुशहाल read more >>
स्कूल, कॉलेज में जब निबंध लिखने दिया जाता था, तब निबंध का एक विषय अक्सर रहा करता था कि ‘विज्ञानः वरदान या अभिशॉप’। तब जितने वरदान लिखे read more >>
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