जैसा भी था वो पहले ही ठीक था अब उसे देख कर मुझे तकलीफ़ होती है
यूं तो मेरे लिए आज भी मर सकता है और किसीको मार भी सकता है वो
पहले खुश मिजाज read more >>
बुढ़ापे का दर्द
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गोरा देवी मेरी मित्र नहीं है पर पास के ही फ्लैट में रहती हैं। कभी - कभी रास्ते में मिल जाती हैं। अक्सर नमस्ते, क� read more >>
अपनी दुनियाँ मे, कोई ,कैसे ?
गुम ,हो गया ।
खुला था ! आसमाँ , देखते-दखते .वो सितारों को सो गया।
अपनी दुनियाँ...........
जाने कैसे ? बदला वक्त ज़िन� read more >>
घुट- घुट के जी रहा हूँ,
घूँट- घूँट पी रहा हूँ।
ये सितम का कहर,
तेरे इश्क का जहर।
लुट- लुट के जी रहा हूँ,
घूँट - घूँट पी रहा हूँ।।
टुकड़े- � read more >>