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দীর্ঘশ্বাস
আমার হৃদয়ের প্রতিটি দীর্ঘশ্বাস, একটি বেদনা ভরা কবিতা। আমার প্রতিটি শব্দে, সাক্ষাৎ না পাওয়ার গভীর বেদনা।
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रंगीन सपने
कभी-कभी रंगीन सपने जीवन की धूसर सड़कों में हमेशा के लिए खो जाते हैं।
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ৰঙীন সপোন
কেতিয়াবা ৰঙীন সপোনবোৰ জীৱনৰ ধূসৰ বাটত হেৰাই যায়, চিৰদিনলৈ
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मिलते नहीं
आज मेरी कविता की लय मिलती नहीं, खो गई कहीं मन भी आज धुंधला है, रंगत उसकी खो गई कहीं। शब्द भी मेरे गुम हैं कहीं मिलते नहीं, भटकते हैं सभी �
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বিষাদৰ অৱসাদ
এইয়া মোৰ শেষ ক্ষণ য'ত প্ৰেমৰ ঢৌবোৰ সিঁচৰিত হৈ বিয়পি পৰিব , কোনোবাজনৰ বিষাদৰ অৱসাদ হৈ।
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শূণ্যতা
নিজান নিশা কিনো সুৰ বাজিলে ৰজনী পোহৰলৈ এতিয়াওঁ বহুপৰ বাকী। বুকুৰ গভীৰত সেই অনামী সুৰৰ ক্ৰন্দন,
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ना मिलने की गहरी पीड़ा
मेरे दिल की हर आह एक दर्द भरी कविता है। मेरे हर लफ़्ज़ में है ना मिलने की गहरी पीड़ा।
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নিজান ৰাতি
নিজান ৰাতি মোৰ দুৱাৰত কোনে টুকুৰিয়াই আন্ধাৰ ফালি এচমকা পোহৰে মোৰ উৰুখা পজাটিত বাৰে বাৰে খুন্দিয়াই। গভীৰ নিশা সপোন গধুৰ জীৱনৰ ম�
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जीना तो कब का छोड़ दिया...
"किसी ने पूछा ‘किस हाल में हो?’ हमने कहा — अभी तो बस जिंदा हैं; जीना तो कब का छोड़ दिया।"🥺🙂 ~ Prince
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वक़्त ने सिखाया ये कड़वा सबक
💔 "कड़वा सच – कभी सोचा था रिश्ते सच्चे होंगे, पर अब तो मतलब ही अपने अच्छे होंगे। वक़्त ने सिखाया ये कड़वा सबक, लोग पास भी हों तो पराये ल
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मत लो नाम मेरा
मत लो नाम मेरा, मुझे यूं ही गुमनाम रहने दो, तारीफ रास नहीं आती मुझे, यूं ही बदनाम रहने दो। छुपाया था जमाने से, हमने हुनर अपना। मत उठाओ
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अतिशोक क्यों ?
अतिशोक क्यों ? इस दुनिया का दस्तूर है ये कुछ फूल नहीं मुरझाएंगे कुछ फूल न तोड़े जाएंगे नए फूल फिर खिलेंगे कैसे... इस दुनिया का दस्तूर �
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