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लाशों की गिनती गुनाहों के साथ नहीं होती। हां, गुनाहा को समझ पाते । वो कि हम -तुम, शायद! हो ही जाता कि सबके सामने वो लाश नहीं होती। नज़रि� read more >>
"वाह... ओ रब्बा... एक तुझे अपना माना था... तू भी लोगों वाली कर गया... एक तुझे सारी बातें बताई थीं... और तू भी पल्ला झाड़ गया... वाह ओ रब्बा... तू भी ल read more >>
समझ नहीं आता मैं क्या करूं रो लूं ज़रा सा या मुस्कुराऊं साथ तो हूँ मैं अपनो के मगर मुश्किलों का हल क्यों आता नहीं नज़र read more >>
तू मेरी याद में सोच में ख्यालों में तू रात के अंधेरों में दिन के उजालों में तू ही है हर सवालों के जवाबों में तू मेरे हर लम्हों के जज़्ब� read more >>
आज भी जिंदा है तू मेरी यादों में रहती हूं अकसर मसरूफ तेरे ख़्यालों में सोचती हूं मैं कैसा होगा वो खूबसूरत नज़ारा जब मिलूंगी मैं अपनी read more >>
कभी हंसते हैं तो कभी रोते हैं कभी पाते हैं तो कभी खोते हैं कभी बिखरते हैं तो कभी सिमटते हैं ज़िंदगी की राहों से हम बस यूंही गुज़रते है read more >>
क्या बताऊं वक़्त ने कैसा सितम ढाया जिधर देखा मायूसी को खड़ा पाया आंखों से आंसू अब छलकने लगे सब जीत कर भी ज़िंदगी से हारने लगे read more >>
तुम क्या जानो टूटना क्या होता है अपनी शख़सियत को मार देना क्या होता है ग़म की बारिश में कभी भीग के तो देखो शायद पता चल जाए दर्द ए दिल क्य read more >>
कहां से ढूंढ के लाऊं मैं अब वो नज़र मेरी हालत की तुमको कहां है ख़बर आंखों से आंसू नहीं रुकते हैं मर-मर के हम जीते हैं read more >>
खुद को भी समेटा और अपनो की भी रखी खबर कभी मुश्किल तो कभी आसान हुई डगर अपनो के साथ कुछ मीठा तो कुछ खट्टा रहा सफर पर ज़िंदगी से जो भी मुझे � read more >>
ढूंढा मैने यहां से वहां मिला नहीं तेरा निशां ज़िंदगी का मेरी क्या है मक़सद क्यों दिल पे हर पल है तेरी दस्तक read more >>
आंखों में छुपी होती है हर इंसान की सीरत बस ज़रूरत है इतनी,पढ़ने की आप में हो का़बिलियत कभी किसी के दिल में उतर के उस का दिल न तोड़ना कहा read more >>
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