"मिट्टी की सोंधी खुशबू में बसी है ज़िंदगी,
गाँव के उस कुएँ में अब भी बचपन पड़ी है,
शहर की रफ्तार में बहुत कुछ पाया मगर,
जो अपनापन गाँव मे� read more >>
हाँ मैं इस देश का वासी हूँ, इस
माटी का क़र्ज़ चुकाऊंगा जीने का
दम रखता हूँ, तो इस के लिए
मरकर भी दिखलाऊंगा ॥
नज़र उठा के देखना, ऐ दुश्मन म read more >>