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गाँव – मेरी जड़ों की खुशबू नंगे पाँव वो पगडंडी, अब भी रुला देती है, जहाँ बचपन ने कंचों की दुनिया रची थी। वो कच्चे मकान की मिट्टी, जो हाथ� read more >>
गाँव की गलियाँ, वो बचपन की बातें, माँ की ममता, दादी की सौगातें। बिलकुल कच्ची पर दिल से पक्की, वो मिट्टी की खुशबू, वो अमर बेल की लच्छी। त� read more >>
वो मिट्टी की सौंधी ख़ुशबू, वो खेतों की राहें, जहाँ हर सुबह उम्मीदों की किरणें हैं चाहें। नदी के किनारे वो रेत की बिछौनी, जहाँ बचपन ने ल� read more >>
गाँव की पगडंडियाँ, बचपन की राहें, माटी की ख़ुशबू, खेतों की बाहें। पलाश के पेड़ों की छाँव निराली, सरसों के फूलों की चूनर मतवाली। चौपाल read more >>
ब्लैक डे ब्लैक डे कैसा ब्लैक डे है हर कोई ब्लैक डे की डीपी लगाने में व्यस्त है ब्लैक डे उनका हुआ जिनकी जिंदगी वीरान हो गई, देश सेवा मे� read more >>
फसलें लहराती थीं जिस आंगन में कभी, अब वहाँ ईंट-पत्थर के महल खड़े हैं, गाँव की गलियाँ मुझे अब भी बुलाती हैं, पर मैं मजबूरी के बोझ तले पड़े read more >>
"मिट्टी की सोंधी खुशबू में बसी है ज़िंदगी, गाँव के उस कुएँ में अब भी बचपन पड़ी है, शहर की रफ्तार में बहुत कुछ पाया मगर, जो अपनापन गाँव मे� read more >>
क्यों लहू को अंगार लिखा है मैने। क्यों शब्दों को प्रहार लिखा है मैनें ॥ आखिर क्यों कलम की धार लगाई जाती है। आखिर क्यों गलियों मे गुहा� read more >>
मैं क्या दूंगा इस मिट्टी को परिभाषा? किसको कह दूं तुम बनो देश की आशा ? अंधो बहरों देखो यह नया तमाशा । लो सुनो मेरे आजाद भगत की भाषा ।। सो read more >>
संघर्ष के पर्यायवाची त्याग के उपमान हैं। राणा महज राणा नही सम्पूर्ण हिन्दुस्तान हैं। दिखती जहाँ पर क्रूरता राणा वहीं ललकारते। क्र� read more >>
हाँ मैं इस देश का वासी हूँ, इस माटी का क़र्ज़ चुकाऊंगा जीने का दम रखता हूँ, तो इस के लिए मरकर भी दिखलाऊंगा ॥ नज़र उठा के देखना, ऐ दुश्मन म read more >>
जब भारत आज़ाद हुआ था। आजादी का राज हुआ था वीरों ने कुरबानी दी थी तब भारत आज़ाद हुआ था भगत सिंह ने फांसी ली थी कइयों का जनाज़ा उठा था इस read more >>
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