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देश-प्रेम
प्यारा देश महान बा हमरो
प्यारा देश महान बा प्यारा देश महान बा हमरो प्यारा देश महान बा हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई एकरों इ पहचान बा प्यारा देश महान बा हमरो प्य�
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बुरा हुआ तस्वीर
मुक्तक रोक सको तो रोक लो,मस्त अटल हम वीर। प्यार भरा उपहार से,लेने आया पीर। देने आया मौज को,ऐसा मेरा फर्ज-- जिस से बदले देश का,बुर�
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अंधी सरकार
मेरे बच्चों आप ने अदम्य साहस दिखाया। लाठियां खा कर अद्भुत विश्वास दिखाया। आखिर धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा-- अंधी स�
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खोई यह सरकार है
खोई यह सरकार है ,खोई मन की लाज। हैरत में अब सांस है,बदतर है अब आज। मर्यादा लज्जित हुई,सीमा है लाचार-- अगर रहे यह हाल तो,बिक जायेगा ताज l
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अपनी धरती मां की मिट्टी से आखरी वादा
सुबह के पाँच बज रहे थे। गाँव की गलियों में अभी अँधेरा था, लेकिन रामदीन की आँखों में नींद नहीं थी। वह अपनी पुरानी चारपाई से उठा, आँगन मे�
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मिट्टी की खुशबू
मिट्टी की खुशबू गाँव के किनारे एक छोटा-सा घर था। घर के सामने मिट्टी का आँगन और आँगन के बीचों-बीच एक पुराना नीम का पेड़ था। उसी पेड़ की छ�
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Tirange ki Kasam
तिरंगे की आख़िरी कसम उत्तर प्रदेश के एक छोटे-से गाँव सूरजपुर में सुबह की पहली किरण जब खेतों पर पड़ती थी, तो ऐसा लगता था जैसे धरती ने हर�
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जालिम है तू है हुक्मरान
जालिम है तू ऐ हुक्मरान, ताकत के नशे में तू चूर है। बेशक बेमिसाल है लश्कर तेरा, पर इंकलाब का ये दौर है। लाठियां चलवाई निहत्थों पर तूने,
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जालिम है तू है हुक्मरान
जालिम है तू ऐ हुक्मरान, ताकत के नशे में तू चूर है। बेशक बेमिसाल है लश्कर तेरा, पर इंकलाब का ये दौर है। लाठियां चलवाई निहत्थों पर तूने,
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जालिम है तू है हुक्मरान
जालिम है तू ऐ हुक्मरान, ताकत के नशे में तू चूर है। बेशक बेमिसाल है लश्कर तेरा, पर इंकलाब का ये दौर है। लाठियां चलवाई निहत्थों पर तूने,
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जालिम है तू है हुक्मरान
जालिम है तू ऐ हुक्मरान, ताकत के नशे में तू चूर है। बेशक बेमिसाल है लश्कर तेरा, पर इंकलाब का ये दौर है। लाठियां चलवाई निहत्थों पर तूने,
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लोकतंत्र की रक्षा में प्रतिरोध की भूमिका
लोकतंत्र की रक्षा में प्रतिरोध की भूमिका ✍️ अजय कुमार सूरज की कलम से "मायने यह नहीं रखता कि तुम युद्ध जीते या हारे, मायने यह रखता है क�
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