जटाओ से है जल प्रवाह जिनके मात् गंग का ; गले मे है जिनके हार विष भुजंग का ; डमट डमट डमट डमरू कह रहा शिवय शिवम् तरल अनल गगन पवन धरा धरा शिवा� read more >>
मैं जब भी आता हूं तेरे दरबार में मेरे मालिक बड़े सुकून से बैठ जाता हूं
ये तेरी दया है मेरे ईश्वर जो मैं हर बार तेरी तेरे दीदार के लिए आ ज� read more >>