आंधी की तरह मेरे मन में यह बहता है,
कब आओगे भोले तेरा भक्त यह कहता है।
अब दरश दिखा जा ना, मन को ना तड़पाना तुझसे यह कहते हैं तुझको ही सब म� read more >>
कविता - ( दुख )
सुख में न जीना आया !
दुख ने सिखाया जीना !!
दुख भला हो तेरा !
जो पत्थर बन गया हीरा !!
सुख में न जीना आया !
दुख ने सिखाया जीना !!
स� read more >>
बैल और किसान...
हल खींचते समय यदि कोई बैल गोबर या मूत्र करने की स्थिति में होता था तो किसान कुछ देर के लिए हल चलाना बन्द करके बैल के मल - म� read more >>
युग- युग ने यह गीत गाया, अत्याचारी कभी बच नहीं पाया ।
जिस ने किया अत्याचार उसको पड़ी समय की मार ,समय कभी राम बनके आए ,ना माने अत्याचारी पु read more >>