कविता = ( मैं नहीं मानता )
झूठी तारीफ़ों के पुल !
मैं नहीं बाँधता !
पत्थरों को ख़ुदा !
मैं नहीं मानता !
कर्म का लेखा लिखना मुझे !
हाथों पर भ� read more >>
सच्चे, भाने वाले, हितकर तथा अन्यों को क्षुब्ध न करने वाले वाक्य बोलना और वैदिक साहित्य का नियमित पारायण करना – यही वाणी की तपस्या है । read more >>