Archana Singh 10 May 2026 आलेख समाजिक मदर्स डे 6502 0 Hindi :: हिंदी
नमस्ते दोस्तों 🙏🏻🙏🏻 आज सभी जगह "मदर्स डे" के गाने बज रहे हैं । फेसबुक , इंस्टाग्राम , यूट्यूब , व्हाट्सएप इत्यादि ... सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर "मांँ" शब्द और उसकी फोटो को लगाकर लोग अपनी-अपनी मांँ के प्रति प्यार और व्यवहार प्रकट कर रहे हैं .... पर मुझे आज सुबह से ये समझ नहीं आ रहा हैं कि ... जब सबकी मांँ उनके पास हैं तो , वृद्धाश्रमों में ,आंखों में जल भरें .... दिल में उम्मीद लिए ... दरवाजे पर हर आहट में मुड़कर देखने वाली , आखिर ! वो किसकी मांँ हैं ".....? " क्या वो अनाथ हैं ".... ? नहीं दोस्तों ! क्योंकि .... मांँ-बाप कभी अनाथ नहीं होते हैं । अनाथ तो ओछी सोच वाले बेटा-बेटी होते हैं । अनाथ तो वो बच्चे हैं जो , मांँ-बाप के जीते जी अपने स्वार्थ के लिए उन्हें वृद्धाश्रम में छोड़ जाते हैं । "सम्मान कर लो जीते जी , वरना मरने के बाद अफ़सोस करते रह जाओगे ! एक बार जो खोया मां-बाप को , ज़िंदगी भर आंसू बहते रह जाओगे " !! हो सकता हैं दोस्तों ! मेरी ये बातें कुछ लोगों को कटु लगें , पर सत्य वचन अक्सर कटु ही लगते हैं । "हैप्पी मदर्स डे" धन्यवाद दोस्तों 🙏🏻🙏🏻💐💐