Nisha Kumari 05 Jul 2026 कविताएँ समाजिक प्यार बचपन 798 0 Hindi :: हिंदी
कितना आसान सा सफर है बचपन प्यार दुलार से भरा हुआ लड़कपन न किसी की फिकर न कोई डर बचपन होता है सबसे बेखबर।। खेलना कूदना मस्ती बहुत करना यही होता है वो आसान डगर खाना पीना और मजे से सो जाना बचपन ही है सबसे प्यारी उमर।। खेल खेल में बड़ी बड़ी बातें करना चोट जो कहीं लग जाए बिलखकर खूब रोने लग जाना है बहुत यह सफर सुहाना।। दोस्तों के साथ घूमना फिरना घर में शोर और उद्यम मचाना डांट कभी जो पड़ जाए गुस्से में फिर मुंह फूलना।। काश लौट आए वो बचपन कर लेते और थोड़ी सी शरारत करते बहुत सारी मस्तियां जी लेते और थोड़ा यह बचपन।।