संदीप कुमार सिंह 03 Jul 2026 ग़ज़ल समाजिक मेरी यह ग़ज़ल सामाजिक है जो की समाज के लोगों का हौसला अफजाई करने हुए आपके जीवन में आने वाली बाधाओं से भी टकराने की हुनर सिखाती है. 56 0 Hindi :: हिंदी
शौक़ पुरा करना ज़िन्दा दिल रहना य़ार मेरे, वक्त की चाल को दृढ जवाब देना य़ार मेरे। हौसला तो है पर वफादार लोग नहीं मिलते, अपने दम पर कर गुलजार ज़िन्दगी प्यार मेरे। बड़े शातिर लोग हैं आजकल के ज़माने में, खुद को बुलंद रख आगे निकल दिलदार मेरे। दोस्ती किया पास आया फिर धोखा दिया, ऐसे लोगों को वीभत्स दंड देना पुकार मेरे । कुछ बातों को नजरअंदाज करना ज़रूरी होता, जीना है तो ये हुनर सीखो लोगों होशियार मेरे। ये जमाना है सर्वगुण सम्पन लोगों के लिए, मुझे इस ज़माने में सबसे आगे कर किरदार मेरे। रास्ते अनेक हैं सफलता पाना सबकी मंजिल है, हर बाधा को पार कर मुझे सफल कर विचार मेरे। वक्त के साथ अजी मैं किरदार बदल लेता हूँ, बस यूँ ही खुशबू मुझ पे लूटाते रहना गुलजार मेरे। चाँदनी रात में शैर करने का मज़ा निराला है, शायर संदीप की शान को फैला असरार मेरे। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह*Author*
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....