नितिश सरोज पाण्डेय 11 Feb 2025 आलेख राजनितिक गाँधी, भारत, स्वतंत्रता, आलोचना, 28835 0 Hindi :: हिंदी
गहन चिंतन के बाद मेरे मन मे भी यही निष्कर्ष निकल कर आया कि गांधी एक बुरे इंसान थे भारतवर्ष की सभी दुर्व्यवस्थाओं में उनका ही हाथ था । आज आजादी के सत्तर वर्षों के बाद भी जो कुछ भी घटित हो रहा उसमे उन्ही का दोष था। तो क्या हुआ अगर उन्होंने अफ्रीका जैसे देश मे उपमहाद्वीप के नागरिकों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार कि निंदा की। उन्हें भी होश तभी आया जब उन्हें ट्रैन से फेक गया था। ये बात अलग है कि उन्हें पहले दिन ही दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा उन्हें पहले आना चाहिए था और इस संकट का पता पहले लगाना चाहिए था। उन्होंने जो राह चुनी वो गलत थी उन्हें उन निरीह जनता से जो बरसों से लाठी खाना ही अपना नियति मान चुकी थी, अहिंसा की जगह शस्त्र उठाने को बोलना चाहिए था । शस्त्रों की सप्लाई कहीं न कहीं से हो ही जाती। भारत मे आकर भी उन्हें अहिंसा का मार्ग नही चुनना चाहिए था । उन्होंने देश की आजादी के लिए किया ही क्या जब कोई संकट आया बैठ गए अनशन पर। अरे खुद तो कहना छोड़ा ही मगर पूरे देश को भी भूखा रखते थे। व्हाट्स एप्प ट्विटर जैसे सोशल मीडिया के द्वारा ये ऐलान करते थे कि मैं भूख हड़ताल पर हूँ तुम भी रहो। उन्होंने भारत के लोगों की स्थिति को पहचाना ही नही जो लोग पिछले हजारों वर्षों से राजतंत्र में रह रहे थे और सुबह से शाम तक जिनका जीवन रोटी की तलाश में बीत जाता था , उनके कहने पर एकाएक शस्त्र उठा कर अंग्रेजों को भगा सकते थे पर उन्होंने ऐसा कुछ नही किया। उन्होंने शक्तिशाली अंग्रेजों के आगे अपना बेकार का अहिंसा आगे रखा जिसे खुद वो भी नही समझ पाए। उन्हें देश के सभी नागरिकों की रक्षा करनी चाहिए थी जो उन्होंने नही कि उन्हें भगत सिंह के साथ बंदूक उठा कर लड़ना चाहिए था और जब उनको फांसी हुई तो बचाना चाहिए था आखिर भगत सिंह ने उन्ही के कहने पर तो हथियार उठाये थे और अंग्रेजों से लड़ाई की थी। बंटवारे के समय उन्हें लोगों से शांति की अपील नही करनी चाहिए थी बल्कि सभी मुस्लिमों को खदेड़ कर भगाना चाहिए था। तो क्या हुआ जो ये मुस्लिम भी भारत मे हजार वर्ष से रहते आये थे तो हैं, ये और बात है कि लोग कहते हैं कि आर्य भी ......। उन्होंने आजादी की लिए किया ही क्या? चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुभाष बोस , बिस्मिल , अशफाक जैसे महान लोगों ने ही तो देश को आजाद कराया और लालकिले पर झंडा फहराया। गांधी ने ये बहुत गलत किया कि अंग्रेजों पर बंदूक नही उठाया उन्हें लंदन जाकर उनके राजा को मारना चाहिए था क्योंकि यहां तो अंग्रेज हम भारतीयों के बदौलत ही राज कर रहे थे । गांधी ने अपने ही देशवासी जो अंग्रेजों के सरकार में थे उनपर शस्त्र का प्रयोग न करके बड़ा गलत किया । नई तालीम , सिविल राइट्स , चंपारण , इकोनॉमिक्स , अछूत न्याय जैसे बेकार के कर्म किये गांधी ने। एक बेकार सा बूढा आदमी ये थोड़े तय करेगा कि हमे विदेश के सामान का प्रयोग करना चाहिए या नही उसकी ये बात कितनी बेबुनियाद है कि हम अपनी जरूरतों को भारत मे ही निर्मित करें । आखिर चीन अमेरिका और रूस जैसे देश जो सामान बनाते हैं उन्हें भी तो उपयोग में लाना है । हां गांधी ने एक काम जरूर किया, अपने कर्मों से कुछ जाहिलों को ये मौका जरूर दे दिया कि उनके नाम पर राजनीति कर वे जाहिल लोग अपनी रोटियां सेक सकें । ये भी तो रोजगार उत्त्पन्न करना ही हुआ ।