डॉ राजेंद्र यादव आजाद 01 Apr 2025 आलेख समाजिक सामाजिक आलेख 22111 0 Hindi :: हिंदी
सोशल मीडिया के प्लेटफार्म फेसबुक का निर्माण करते समय मार्क जुकरबर्ग ने भी नहीं सोचा होगा कि वह जिस सोशल मीडिया के प्लेटफार्म का निर्माण कर रहा है वह सोशल प्लेटफॉर्म भारत में अश्लीलता फैलाने में एक दिन अपनी अहम भूमिका निभाएगा। आजकल फेसबुक पर आ रही हर दूसरी रील अश्लीलता से भरी हुई होती है। डॉलर कमाने के चक्कर में भारतीय महिला पुरुष अपने फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए अश्लील भाषा का उपयोग कर रहे हैं जो सभ्य समाज के लिए कदापि उचित नहीं है । पिछले दिनों एक समाज विशेष ने अपने समाज की महा पंचायत कर समाज हित में अपने समाज की महिला व पुरुषों द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैलाई जा रही अश्लीलता को रोकने के लिए कठोर कदम उठाया । समाज की पंचायत के उठाये अहम कदम के बाद इस समाज की एक महिला फेसबुक पर लाइव आकर अपने समाज के पटेलो को अभद्र भाषा में गरियाने लगी । फेसबुक पर दिन प्रतिदिन बढ़ रही अश्लीलता में अन्य सामग्री को लेकर सभी समाज की चिंता बढ़ती ही जा रही है । फेसबुक पर अश्लील सामग्री को कम करने के लिए मेटा कंपनी ने कई कठोर कदम उठाये भी है । जिनमें से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी उपयोग किया जा रहा है और अश्लील सामग्री को पहचान कर हटाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर कुछ महिलाओं ने तो अपनी संस्कृति का हनन करके केवल अश्लील भाषा में अश्लील प्रदर्शन का अड्डा बनाकर रख दिया है। फेसबुक की हर दूसरी रील अश्लीलता से भरी हुई होती है। सभ्य परिवार के लोग तो बिना इयरफोन लगाएं उक्त रीलो को देख ही नहीं सकते। एक दिन मैं खूद अपने परिवार में बैठा फेसबुक की रील को स्क्रोल कर रहा था अचानक से ही एक रील बिल्कुल अश्लीलता से भरी हुई आ गई मैं स्क्रोल करता इससे पहले ही मुझे परिवार के मध्य शर्मिंदा होना पड़ गया । मार्क जुकरबर्ग ने फेसबुक की शुरुआत 4 फरवरी 2004 को की थी इसका उद्देश्य लोगों को एक दूसरे से जोड़ना और आपसी विचारों को साझा करना था । लेकिन आज फेसबुक समाज में अश्लीलता दुर्भावना आपसी मनमुटाव का मुख्य कारण बन रहा है। मार्क चाहते थे की फेसबुक के माध्यम से दुनिया भर में एक दूसरे अपने विचारों का आदान-प्रदान कर सके लेकिन सोशल मीडिया के बेहतरीन प्लेटफार्म पर आज समाज के लोगों में आपसी दुर्भावना मनमुटाव हुआ और अश्लीलता को बढ़ा रहा है। फेसबुक पर लाइव आकर महिला पुरुष एक दूसरे को अभद्र अश्लील भाषा में गालियां बक रहे हैं वहीं दूसरी तरफ फेसबुक की अश्लील रीले लोगों को मानसिक रोगी व अपराधी बना रही है । फेसबुक की अश्लीलता से युवा वर्ग नशेड़ी व अपराधी बन रहा है । फेसबुक पर अगर किसी व्यक्ति के फॉलोअर्स बढ़ते हैं और 60000 मिनट का वाच टाइम हो जाता है तो फेसबुक उस यूजर को मोनेटाइज कर देता है जिससे यूजर व्यक्ति के वीडियो व्यूज के आधार पर पैसे मिलने लगते हैं । पैसों के चक्कर में ही लोग अश्लील भाषा और भाव भंगीमा का उपयोग करते हैं ताकि उनके फॉलोअर्स बढ़ सके और फेसबुक उस यूजर को पैसा देना शुरू कर दें । आज की आपा धापी के युग में लोग केवल फेसबुक इंस्टाग्राम को ही अपने मनोरंजन का साधन मान चुके हैं। पिछले कुछ वर्षों से सोशल मीडिया का यह बेहतरीन प्लेटफार्म अभद्र भाषा और अश्लीलता के अड्डे में तब्दील हो चुका है । अगर समय रहते फेसबुक इंस्टाग्राम पर बढ़ती अश्लीलता को रोका नहीं गया तो यह दोनों ही प्लेटफार्म समाज के विनाश का कारक बनेंगे। डॉ राजेंद्र यादव आजाद दौसा राजस्थान मोबाइल 94 1427 1288
डॉ राजेंद्र यादव आजाद 12 अगस्त 1971 बेवल ज�...