न जाने राही-
कितने इस राह पर...
एक कहानी-
बन जाते इस राह पर...
ज़िंदगी सुलझता-
नहीं उलझता जाता है यहां...
भटकता-
जीवन गुज़र जाता ए-कहां?...
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"जिंदगी के इस राह में-
युगों-युगों से चले आ रहे हैं"!
"ना जाने-
कितने ही मुसाफिर,
यहां भटकते आ रहे हैं"!
"देखो कोई-
ए-बिरला ही पहुंच,
पाता अ read more >>
"असीम कृपा-
भगवान् धन्वंतरि की बरसे"!
"हृदय से हों-
अमीर कुबेर की दया बरसे"!
"दिल में शांति-
घर संसार में व्याप्त रहे अपार"!!
"ए-मिटे-
दूर� read more >>