करम हर क़दम पर, है तेरी ये नज़र,
ऐ मुसाफ़िर ज़रा, अब तू संभल कर।
काट कर ये कोटी जन्म दिए,
मानव तन दिया है, तू संभल कर।
संभल के चल तू , ये मा� read more >>
दया तू लुटा देना, कुदरत ने दिया है,
जो बांटो ख़ुशी को, वो बढ़ता गया है।
ये मालिक की दुआ है, हर जर्रे में शामिल,
जो देखा उसे दिल से, वो हर सू read more >>
खामोशी में भी जो गुढ़ बात कह जाए,
वो अश्क आंँखों से मोती बन बह जाए।
रिश्तों की डोरें, सांँसों की एक सरगम,
इक पल में ही सब कुछ कितना सह जा� read more >>