मोती लाल साहु 16 Jun 2025 शायरी धार्मिक मुसाफ़िरों का शहर-#the earth- हुज़ूर तू ही वाहेगुरु- #"O Master, You are indeed the Divine Guru" - खोज- #explore- प्रेरणा- #motivation- शायरी- #poetry- आत्मज्ञान- #self knowledge- मोती- 14269 0 Hindi :: हिंदी
काफ़िला सा ये शहर है, मुसाफ़िरों का बसेरा, माया की यहां हुकूमत, गहरा है हर डेरा। तेरी ही ये गुलिस्तां, तू ही है सब में हुज़ूर, तू ही हर लहर में, तू ही सच्चा वाहेगुरु। ये शहर है मुसाफ़िरों का, एक अंतहीन काफ़िला, माया के हाथों में सब, चलता है हर क़बीला। तेरी ही ये गुलिस्तां, तू ही है मालिक ओ- हुज़ूर, तेरी ही हर मौज में शामिल, तू ही मेरा वाहेगुरु। काफ़िला-ए दुनिया ये, मुसाफ़िरों का शहर है, माया की यहां सल्तनत, हर सूंँ इसका असर है। ये तेरी ही गुलिस्तां, तू ही है इसमें हुज़ूर, हर सांँस में तू , हर धड़कन में वाहेगुरु। -मोती