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मोती लाल साहु
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मोती लाल साहु
मोती लाल साहु
मोती लाल साहु
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ऩफा नुक़सान का हिसाब किताब कहां देखें
चलते-चलते वक्त- काफ़ी गुज़र गए ज़िंदगी के जीवन के- दिन भी काफ़ी खर्च हो गए ऩफा नुक़सान- का हिसाब-किताब कहां देखें ? -मोती
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परमात्मा मेरे अंदर है
यूंकि- अपना ही पूजा- पाठ क्यों नहीं करता यूंकि- क्या बुराई है इसमें- हर किसी से पूछ लो यूंकि- उत्तर मिलेगा- परमात्मा मेरे अंदर है -म�
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सुकून भरा ज़िंदगी के लिए
ज़ेहन में ज़रूर आनंद भरा है, तार-तार जीवन का भरपूर है। लुटा देना चाहता हूं प्यारों को, सुकून भरा ज़िंदगी के लिए।। -मोती
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सत्य और नश्वर का संयोग
सत्य और- नश्वर का संयोग यह शरीर! जिसकी- प्रकृति में परिवर्तन है, वह सत्य नहीं हो सकता यूंकि, सत्य में परिवर्तन नहीं है सत्य कालातीत �
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यूं ही निगाह टिकती नहीं कहीं
यूं ही- निगाह टिकती नहीं कहीं! आपकी निगाह- किसी विशेष खास पर स्थिर है आप स्वीकार करें- आपका दिल पसंद करता है उसे अब- आपको परवाह करनी �
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जीवन के वास्तविक मायने
ज़िंदगी के- चाहे कितने ही पड़ाव पार करके आए- कोई मायने नहीं रखते जब- स्वयं के अंतरतम, की गहराई से गुज़रेंगे तब जीवन के- वास्तविक मा
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जीवन का सबसे बेहतरीन क्षण
यह बेहतरी- उस बेहतरीन सत्ता, की ओर से बख्शा गया है हर क्षण उस- बेहतरीन सत्ता का अंश है दया- और कृपा से भरा हुआ है लौट कर- कभी वापस नही�
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हरियाली ही कुदरत थी रिश्तों से भरी थी
हरियाली ही कुदरत थी, रिश्तों से भरी थी। यूं चले गए परिंदे सभी, यूं पेड़ सुख चले।। -मोती
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चार की सूरत प्यारी नहीं इस जग में
चार की सूरत- प्यारी नहीं इस जग में, ये घोलते ज़हर जीवन में नासूर बन रहते इस तन में जीवन भर देते- असहनीय पीड़ा, नाम है इनका- काम-क्रोध-म�
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एक तरन्नुम उठ रही है दिल में मेरे
एक तरन्नुम- उठ रही है दिल में मेरे आ चलेंगे कहीं दूर- इन वादियों में निर्झर, बहती तो होगी दरिया वहां गाते तो होंगे पंछी वहां आ चलेंगे
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