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मोती लाल साहु

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My Articles

जीवन की- धारा में बहता गया,, कुछ इस- तरह से बहता चला गया, उस जहां में छलकते जाम अमृत रस से भरे पड़े थे मैं परमानंद के आगोश में था..!! -मोती read more >>
हे नीली छतरी वाले- हे शिव गुरु तू जगत का, करतार तू ही सबका तारणहार तेरी यह दुनिया- तुझसे छुपी कहां है, तू ही जाने तेरी अद्भुत कहानी मै read more >>
बेसुध बहे- संसार- सागर की धारा! बेसुध बह जाता- वह जो संभलना पाता सत्य की धारा- माया भी बहती जाती अमृत की धारा- विष भी बहती जाती जो र� read more >>
नारद जी भगवान् से कहते हैं ! भगवान् मैं- 1. ऋग्वेद ! 2. यजुर्वेद ! 3. सामवेद ! 4. अथर्ववेद ! 5. इतिहास पुराण ! 6. वेदों का व्याकरण ! 7. पित्र कर्म को ! 8 read more >>
भगवान् शब्द के- अक्षर !! भ- भुमी , ग- गगन , वा- वायु , अ- आकाश , न- नीर इन पांच महाभूत से - बना शरीर भगवान् शब्द के- संधि! भग + वान भग से= इस शरी read more >>
आ गया संस्कार- शिष्टाचार का नया चलन है!! हर-कोई- दीवाना और दीवानी हैं जगह-जगह- इश्क़ के कंपनी खुले हैं, मोबाइल ने तो लूट लिया सारे ज़म� read more >>
अमर और व्यापक! जो कुछ भी- दृष्टिगोचर है अंततः उसी, अमर व्यापक का परिणति है हुआ है और हो रहा है! -मोती read more >>
तू ही आरंभ है- तू ही अनंत है! तू आदि है- तुझ से पुरानी कोई चीज नहीं तू नूतन है- तुझ से नई कोई चीज नहीं देखा ना- अव्वल तुझसा, तुझ से ऊंची क read more >>
दरबारे ख़ास! ज़िंदगी के- इन राहों में गर, तमन्ना-ए-दिल में हो रूहानी सफर का तो दरबार-ए-खास में! गैब-ए-इल्म का, दरख़्वास्त कर- मुर्शीद read more >>
विलक्षण- जीव जगत में तु श्रेष्ठ, एक कुव्वत के खातिर रूबरू- हो जा इस जीवन से क्योंकि- रब ने चुना है, तुम्हें अपने खातिर -मोती read more >>
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