जीवन की-
धारा में बहता गया,,
कुछ इस-
तरह से बहता चला गया,
उस जहां में छलकते जाम
अमृत रस से भरे पड़े थे मैं
परमानंद के आगोश में था..!!
-मोती read more >>
नारद जी भगवान् से कहते हैं !
भगवान् मैं-
1. ऋग्वेद !
2. यजुर्वेद !
3. सामवेद !
4. अथर्ववेद !
5. इतिहास पुराण !
6. वेदों का व्याकरण !
7. पित्र कर्म को !
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भगवान् शब्द के- अक्षर !!
भ- भुमी ,
ग- गगन , वा- वायु ,
अ- आकाश , न- नीर
इन पांच महाभूत से -
बना शरीर
भगवान् शब्द के- संधि!
भग + वान
भग से=
इस शरी read more >>
तू ही आरंभ है- तू ही अनंत है!
तू आदि है-
तुझ से पुरानी कोई चीज नहीं
तू नूतन है-
तुझ से नई कोई चीज नहीं
देखा ना-
अव्वल तुझसा,
तुझ से ऊंची क read more >>