मन भरने लगा है
नाजाने क्यो
जीने से डर लगने लगा है........
अपने हों या बेगाने
सब के अलग - अलग हैं पैमाने
किस - किस का माप समझूं मैं अनाड़ी
जब हर � read more >>
क्यों नाराज़ रहते हो
क्यों नहीं कुछ कहते हो.....
हमें भी दर्द देते
क्यों खुद भी दर्द सहते हो.......
तुम्हें क्या पता
जब महीनों तुमसे बात नही read more >>
यादें - बचपन की
यादों के उन उधड़े चिथड़ों को
आज भी फिर से जीना चाहता हूं
आज फिर से उस बचपन को जीना चाहता हूं......
कितना आनंदित था मैं
न सोने read more >>
कुछ सवाल - कुछ जवाब
न कोई कलम, न कोई किताब, रखता हूं
पल भर की जिंदगी है यह सोच
न कुछ लेने का, न कुछ देने का, हिसाब रखता हूं........
न अलीशान महलो� read more >>