Onkar Verma 21 Feb 2024 कविताएँ प्यार-महोब्बत True love poetry 23409 0 Hindi :: हिंदी
क्यों नाराज़ रहते हो क्यों नहीं कुछ कहते हो..... हमें भी दर्द देते क्यों खुद भी दर्द सहते हो....... तुम्हें क्या पता जब महीनों तुमसे बात नहीं होती..... महीनों मेरी यहां रात नहीं होती...... जागता रहता हूं पागलों सा बस भागता रहता हूं कुछ भी समझ नहीं आता कुछ भी मन को नहीं भाता अकेले में बतियाने लगा हूं लोगों से घबराने लगा हूं बात करना तुमसे मुलाक़ात करना आदत सी हो गई है हमारी जब तलक बात नहीं होती....... जब तलक मुलाक़ात नहीं होती...... ख़ुदा कसम महीनों मेरी यहां रात नहीं होती........ सोना चाहते तो सो नहीं पाते जब रोना चाहते तो रो नहीं पाते कुछ भी चाहत पूरी नहीं होती हमारी तो मज़बूरी भी मज़बूरी नहीं होती.... लोग जो चाहें,वो मिलता है...... उनकी हर कली पे फूल खिलता है उनके चाहने से मौसम बदलते हैं हमारे तो बरसात में भी बरसात नहीं होती जब महीनों तुमसे बात नहीं होती..... महीनों मेरी यहां रात नहीं होती......