कृपाण सा किरदार था, मोम बन गया हु ,
ख़ून की बात किया करता था आज मैं थक गया हू ,
थका क्या शायद में डर गया हू ,
सो(निंद) लू चाहे जितना पर निंद म� read more >>
शून्य होता जा रहा हूँ,
पता नहीं जिंदा हूँ या मरता जा रहा हूँ ,
सूरज की भाति रोज निकलता हू शाम को लौट आता हूँ ,
मौन होता जा रहा हूँ ,
शून्य ह� read more >>