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संदीप कुमार सिंह
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संदीप कुमार सिंह
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संदीप कुमार सिंह
@ sandeep-kumar-singh
, Bihar
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me.
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माँ का प्यार दुलार-सदा कायम रहता है
#विधा:_रोला छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" माँ का प्यार दुलार,सदा कायम रहता है। खुद पर हो विश्वास,उसे सबकुछ मिलता है। प्राण समर में या
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सुन ले मेरा अर्ज अब-जीवन कर गुलजार अपनों के साथ है
#विधा:_कुंडलिया छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" सुन ले मेरा अर्ज अब, जीवन कर गुलजार। अपनों के साथ है,माँ का प्यार दुलार।। माँ का प्यार द
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माँ का प्यार दुलार-अपनों के ही साथ है सुन ले मेरा अर्ज अब जीवन कर गुलजार
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" अपनों के ही साथ है,माँ का प्यार दुलार। सुन ले मेरा अर्ज अब,जीवन कर गुलजार।। कभी कभी नीरस ल�
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रोक सके तो रोक ले-मस्त अटल हम फौज
#विधा:_मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" रोक सके तो रोक ले,मस्त अटल हम फौज। प्यार भरा उपहार से,देने आया मौज। लेने आया दर्द को,मेरा �
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प्यार का परवान-दुनियाँ के रंगीन जो हैं नजारे जो देते हैं हमें बेहिसाब बहारें
दुनियाँ के रंगीन जो हैं नजारे, जो देते हैं हमें बेहिसाब बहारें। नाना प्रकार की वस्तुएं मेरे लिए, कुदरती सम्पदा है मेरे लिए। ये सारे �
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ऐ अजनबी आ जरा पास तो आ-कुछ बात तुम कहो कुछ मैं कहूं
ऐ अजनबी आ जरा पास तो आ, कुछ बात तुम कहो कुछ मैं कहूं। फिर धीरे_धीरे दोनों करीब आयेंगे, और मस्ती के नगमें तब गायेंगे। दोनों कि दोस्ती बे�
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जंगल से मंगल-जंगल है तो पर्यावरण संतुलन बना रहता है
जंगल से मंगल है। जंगल है तो पर्यावरण संतुलन बना रहता है। समयानुकूल वर्षा भी होती है। और अच्छी फसल से लोगों में उत्साह भी बना रहता है। आ�
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दुख का कारण खोजिए-सदा रहें तब मस्त
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" दुख का कारण खोजिए,सदा रहें तब मस्त। बुरे चीज से दूर रह, होगा कभी न अस्त।। दुख का कारण खोजिए,�
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कहने को सब कह रहे-आते सभी न काम
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" कहने को सब कह रहे,आते सभी न काम। खुद के चलें विवेक से,जीवन हो गुलफाम।। कहने को सब कह रहे,लोग�
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आता है सच सामने-मंथन जब हो तेज
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" आता है सच सामने,मंथन जब हो तेज। और दूध का दूध हो,मन में हो अंगेज।। आता है सच सामने,वक्त रहे अ�
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