#विधा:_दोहा छंद
#"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत"
मुझ पर यह अहसान कर, मुझ से कर ले प्यार।
और करो अधिकार भी, बनकर यूँ दिलदार।।
मन से मन को मेल क� read more >>
(सोरठा छंद)
जीना है तो सीख,मेरे हमदम सब कला।
लेना कभी न भीख,देने वाला खुद बनो।।
करिए यहां कमाल,हैरत सब जन ही करे।
ऐसे हों जो लाल,मरकर भी � read more >>