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संदीप कुमार सिंह
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संदीप कुमार सिंह
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संदीप कुमार सिंह
@ sandeep-kumar-singh
, Bihar
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me.
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मन में जब दृढ़ लगन हो-मंजिल मिले जरूर
(दोहा छंद) मन में जब दृढ़ लगन हो,मंजिल मिले जरूर। फिर तो यहां मिशाल बन,दुनिया को दें नूर।। रहें तैयार हर घड़ी,मंजिल मिले जरूर। यहां अस�
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यही बात है सीखना-प्यास न जाने जात
(दोहा छंद) यही बात है सीखना, प्यास न जाने जात। रहते कांटे फूल सह,करते मन की बात।। प्यास न जाने जात को,मौसम करे न वैर। सब पर एक प्रभाव दे,स
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मनचाहा किसको मिला-जीवन साथी खास
(दोहा छंद) मनचाहा किसको मिला,जीवन साथी खास। किस्मत की तो बात है,फिर भी हो नव प्यास।। मनचाहा किसको मिला,पूर्ण धनिक परिवार। शिक्षा का ज�
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पूर्ण करे सब आरजू-खूब करे वह भोग
(दोहा छंद) पूर्ण करे सब आरजू, खूब करे वह भोग। मनचाहा किसको मिला,बिरले ऐसे लोग।। मनचाहा किसको मिला,जीवन साथी खास। किस्मत की तो बात है,फ
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सावन जल बरसे अभी-चमक रही है दूब
(दोहा छंद) सावन जल बरसे अभी, चमक रही है दूब। हरी चुनरिया ओढ़कर, धरती लगती खूब।। हरी चुनरिया ओढ़कर,वसुंधरा है मग्न। जो देती है अति खुश�
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पुरुष स्त्री सब सौम्य है- रग रग में है प्यार
(दोहा छंद) पुरुष स्त्री सब सौम्य है, रग रग में है प्यार। बरसे सावन झूम के,लाया दिव्य निखार।। बरसे सावन झूम के,पानी में है जोश। भींग भीं
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अपने मुंह मिट्ठू बने-ऐसा करो न काम मिले गवाही लोग से सुन्दर जिनके नाम
(दोहा छंद) अपने मुंह मिट्ठू बने, ऐसा करो न काम। मिले गवाही लोग से, सुन्दर जिनके नाम।। अपने मुंह मिट्ठू बने,हाँके खाली झूठ। फँसना कभी न या
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धरती के भगवान से-रखिए सब परहेज ज्यादा रखें लगाव तो कर देगा निस्तेज
(दोहा छंद) धरती के भगवान से,रखिए सब परहेज। ज्यादा रखें लगाव तो, कर देगा निस्तेज।। धरती के भगवान तो,धरती मातु विशाल। राजा रंक समाय सब, इ
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पहले जैसा अब कहां-प्यारे प्यारे लोग लगे हुए सब होड़ में और बढ़े नव रोग
(दोहा छंद) पहले जैसे अब कहां, प्यारे प्यारे लोग। लगे हुए सब होड़ में,और बढ़े नव रोग।। पहले जैसे अब कहां, उमस भड़ी है बात। चक्कर काटे खू�
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मारा मारा मैं फिरा-प्यास न जाने जात मुझे अजनबी थाम कर
(दोहा छंद) मारा मारा मैं फिरा,प्यास न जाने जात। मुझे अजनबी थाम कर, नेह किया बरसात।। यही बात है सीखना, प्यास न जाने जात। रहते कांटे फूल �
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