संदीप कुमार सिंह 14 Jul 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 20142 0 Hindi :: हिंदी
(दोहा छंद) पूर्ण करे सब आरजू, खूब करे वह भोग। मनचाहा किसको मिला,बिरले ऐसे लोग।। मनचाहा किसको मिला,जीवन साथी खास। किस्मत की तो बात है,फिर भी हो नव प्यास।। मनचाहा किसको मिला,पूर्ण धनिक परिवार। शिक्षा का जब साथ हो,मिलता सब अधिकार।। मनचाहा किसको मिला,खुशियों में दिन रात। बाधा तो आते रहे,रखें मधुर दृढ़ नात।। मनचाहा किसको मिला,रूप रंग रस नाम। जिसकी जैसी भावना,वैसा ही हो काम।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....