न जाने !मन में कितनी उलझन है! इन उलझनों को सुलझाने का! कोई एक रास्ता तो दो!
कहनी है बहुत कुछ तुमसे !
कभी मेरी भी बातों को
सुनने को एक शाम त� read more >>
आज गगन में उड़ते पंछी
को देखकर न जाने क्यों?
मन यह सोच रहा है !
कितना ही अच्छा होता!
अगर बन जाते पंछी हम!
मस्त निर्भीक! होकर मस्त !
गगन मे read more >>