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तर्ज=>काए करत नए नए हैरान जय हो गणराजा जू तुम हो महान पूजत है तुम खा जो सारो जहान माँ गोरी के प्यारे पिता शम्भू के दुलारे! तुम एक दन्� read more >>
आ गए तुम प्रिय ! आ जाओ जरा .!ठहरो सुनो! अपनी दिनभर की परेशानियों को बाहर ही छोड़ आओ प्यार और एक दूसरे के ऊपर विश्वास की भावना के आधार पर. read more >>
क्यों? न! प्रिय मैं तुम्हें पहचान पाई ! क्यों ?मैं दौड़ती रही उस कठिन समय में तुम संग अकेले ! क्यों ?न राह के कांटे को मैं समझ पाई ? जो मैंने read more >>
जब हम जिंदगी जीना सीख चुके थे अपने सपनों को हकीकत में बदलने की कोशिश कर चुके थे गमों को भूलाकर खुशियों से रिश्ता जोड़ चुके थे फिर क� read more >>
लड़का :- कैसे यक़ीन दिलाऊँ मेरे मेहबूब सनम तुझे कितना प्यार मैं करता हूँ कैसे यक़ीन दिलाऊँ मेरे मेहबूब सनम त� read more >>
चुपके हा हा चुपके रहना आपके दिल में हमको छुपके चुपके-चुपके हा हा चुपके उस चांदनी को देखो बैठी है चाँद से वो रूठे चाँद मनाये उसको चुपके � read more >>
भगवान भोलेनाथ के श्रीचरणों में, सादर साष्टांग निवेदित, स्वरचित लोकभाषायी अवधी रचना। ----------------------------------------------------- हथवा त्रिशूल,डमरू,नन्दी पे read more >>
स्वरचित रचना--- एक दर्द होता तो....! संदर्भ--- दर्द एक दर्द होता तो सह लेते हम। एक बेदर्द होता तो रह लेते हम। पर यहां तो पड़ा हू read more >>
स्वरचित रचना--- गोलियां अइंठा न बदनिया..! संदर्भ--- एक अवधी/भोजपुरी लोकभाषायी निर्गुण रचना। गोरिया,अइंठा न बदनिया, ससुरे जाइ का परी। टे� read more >>
स्वरचित रचना--- किसी से कोई प्यार नहीं करे....! संदर्भ---प्यार-मोहब्बत दिल देता है रो-रो दुहाई, किसी से कोई प्यार न करे! बड़ी महंगी पड़ेगी ज read more >>
स्वरचित रचना---आओ सुनाएं.........! संदर्भ--- श्री रामकथा। आओ सुनाएं तुमको रामकथा बड़ा प्यारा। !!टेक०!! भटके हुए लोगों सुन लो, होगा कल्याण तुम� read more >>
स्वरचित रचना---जिंदगी न सही,................! संदर्भ---गम ए जुदाई जिंदगी न सही, तू मौत ही बनकर आ जा। आ मगर‌ आ,तू इक बार तड़प कर आ जा आज बादल उमड़ पड़ read more >>
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