क्यों? न! प्रिय मैं तुम्हें पहचान पाई !
क्यों ?मैं दौड़ती रही उस कठिन समय में तुम संग अकेले !
क्यों ?न राह के कांटे को मैं समझ पाई ?
जो मैंने read more >>
भगवान भोलेनाथ के श्रीचरणों में, सादर साष्टांग निवेदित, स्वरचित लोकभाषायी अवधी रचना।
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हथवा त्रिशूल,डमरू,नन्दी पे read more >>
स्वरचित रचना--- किसी से कोई प्यार नहीं करे....!
संदर्भ---प्यार-मोहब्बत
दिल देता है रो-रो दुहाई,
किसी से कोई प्यार न करे!
बड़ी महंगी पड़ेगी ज read more >>
स्वरचित रचना---आओ सुनाएं.........!
संदर्भ--- श्री रामकथा।
आओ सुनाएं तुमको
रामकथा बड़ा प्यारा। !!टेक०!!
भटके हुए लोगों सुन लो,
होगा कल्याण तुम� read more >>
स्वरचित रचना---जिंदगी न सही,................!
संदर्भ---गम ए जुदाई
जिंदगी न सही, तू मौत ही बनकर आ जा।
आ मगर‌ आ,तू इक बार तड़प कर आ जा
आज बादल उमड़ पड़ read more >>