शहर मैं जब आया ,
थोड़ा सा घबराया ,
देख उसकी भव्यता को,
मन मेरा सकुचाया,
मन मेरा उदास था ,
घर न मेरे पास था।
पर मुझपे भी जिम्मेदारी थी।
मां read more >>
मेरा देश महान था ,महान था ,महान था,
आचरण की सभ्यता का सम्मान था,
वेद शक्ति ही थी गूंजती सदा जहां,
मंत्र भी थे उच्चता पाते वहां,
मैं उस देश � read more >>
गीत-देवाहून श्रेष्ठ असे देवस्थान
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देवाहुन श्रेष्ठ असे देवस्थान
ते आहे मानवा ,माणुसकीचे नाते
माणुसकी शिकवी ,आम्हा एकच read more >>
गीत- चलो आज सच बोला जाय।
रचना- जितेन्द्र शर्मा
तिथी- 02/01/2023
चलो आज सच बोला जाए!
भेद कोई अवशेष रहे ना, क्यों ना आज दिल खोला जाए।
चलो आज सच ब� read more >>
शीर्षक----सीख चुके थे
26/12/2022
जिंदगी को जहां फिर से जीना
सीख चुके थे l
हम यू छोटे-मोटे दर्द सहना
सीख चुके थे.
आंखों से जब दर्द के आंसू बहन� read more >>