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साम्प्रदायिकता
‘‘साम्प्रदायिकता’’ भारत भूमि में हम जन्में यारों, यह देश हमारा अपना है, उद्धार करो इस मात्र भूमि का यही हमारा सपना है । इस दुनिय�
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चलो एक वृक्ष लगायेें
चलो एक वृक्ष लगायेें आओ चलो एक वृक्ष लगायें मानव होने का फर्ज निभायें, सावन के हम गीत गायें धरा के यौवन को महकायें। पेड़ नहीं है, स्वा
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प्रियतम आने वाला है
‘‘प्रियतम आने वाला है’’ सात रंगो से सजा मौसम बड़ा निराला है, सुना है मैने आज मेरा प्रियतम आने वाला है। कोयलिया भी गा रही है नाच रहे ह
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लहर उठी जवानी में
’’लहर उठी जवानी में‘‘ जानबूझ कर किया है तूने या हुआ नादानी में, मार के पत्थर कहां चली तू ठहरे हुए पानी में। मेरी दुनिया तो यारों बस
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मेरी चांदना
मेरी चांदना कशी बिसरू तांउ प्यारी हंउ तू से मेरी चांदना तेरे अलावा दुनिया मा मुके कासीकी याद आंदी ना। गाल मा तेरो कालो तिल घायल कर�
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देखो मेरी नानी आयी
‘‘देखो मेरी नानी आयी’’ नानी आयी नानी आयी देखो मेरी नानी आयी, भर-भर के वो चीजें लायी गोदी उठाकर मुझे खिलायी। मम्मी मुझको दूध पिलाती
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मेरा हमसफ़र
“मेरा हमसफ़र” जब जवां हुऐ थे जज्बात हमारे हुए एक दिन पीले हाथ हमारे, फिर घर आयी उनकी बारात हमारे कदमों से कदम मिला के चले वो साथ हमारे।
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आशा की एक किरण
“आशा की एक किरण” ख्वाबों की पटरी पर अपनी गाड़ी चल रही है चार दिनों की ज़िन्दगी भी अब खल रही है आहिस्ता आहिस्ता अब ये शाम ढल रही है सुना ह
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देखा एक संसार अनोखा
‘‘देखा एक संसार अनोखा’’ हाय ! मैने यह क्या देखा रब्बा तेरा संसार अनोखा कहीं बाढ़ कहीं सूखा देखा कहीं नंगा कहीं भूखा देखा। जिसको बीज
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समतौण
समतौण एक बुढ़ड़ी बोलण लगी, कि यूंकि सुख-सुविधाऐं सबा गाड़ा बगी कोई कासी कि ना सुणदो ये जमाने पार कणी आग लगी। एक जमानो सो तो जब सास ससुर
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सोचो ज़रा ये क्यों बनाया, बंदूकों को अपना गहना
न समझो तुम कैसा देश है, बिहार की गाथा अजीब है। अपराधी का वह मज़हब है, सत्ता में बैठे राम का भक्त। भ्रष्ट पर जो आवाज़ उठाया, मृत शरीर को जग�
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पहाड़ी टोपी
पहाड़ी टोपी पहाड़ों की पहचान है, टोपी पुरखों का सम्मान है, टोपी आज का अभिमान है टोपी भविष्य का अरमान है टोपी। देश के गौरव का प्रमाण �
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